ताजा खबरें | धनखड़ की प्रतिक्रिया को कार्यवाही से निकालने की मांग को लेकर कांग्रेस सदस्यों ने किया बहिर्गमन

नयी दिल्ली, 23 दिसंबर राज्यसभा में शुक्रवार को कांग्रेस सदस्यों ने गत 21 दिसंबर को कांग्रेस संसदीय दल की बैठक में संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा की गई टिप्पणी पर आसन की ओर से दी गई प्रतिक्रिया को कार्यवाही से हटाने की मांग को लेकर शून्यकाल में हंगामे के बाद सदन से बहिर्गमन किया।

उच्च सदन की बैठक शुरू होने के बाद सभापति जगदीप धनखड़ ने आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाए। फिर, उन्होंने शून्यकाल शुरू कराया और भारतीय जनता पार्टी के डॉ जी वी एल नरसिम्हा राव से उनका लोक महत्व से जुड़ा मुद्दा उठाने के लिए कहा।

इसी बीच कांग्रेस सदस्य प्रमोद तिवारी ने कुछ कहना चाहा। सभापति ने उन्हें अनुमति दी और तिवारी ने कहा कि सदन के बाहर संसदीय दल की बैठक में कोई बात की जाए और उसका संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा संज्ञान लेना और तत्काल प्रतिक्रिया देना इस सदन की परिपाटी नहीं है।

तिवारी ने कहा कि आसन की ओर से जिस बात पर प्रतिक्रिया दी गई वह संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की अध्यक्ष ने संसदीय दल की बैठक में की थी, इस सदन में नहीं की थी।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री अगर सदन के बाहर कुछ कहते हैं और उस बात को सदन में उठाया जाता है तो आसन की यह व्यवस्था है कि सदन के बाहर कही गई बातों पर संज्ञान नहीं लिया जाएगा।

तिवारी ने कहा, ‘‘लेकिन यह दुर्भाग्य की बात है कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की अध्यक्ष ने संसदीय दल की बैठक में न्यायपालिका को लेकर जो चिंता जताई थी उस पर सदन में प्रतिक्रिया दी गई।’’ तिवारी ने मांग की कि इसे सदन की कार्यवाही से निकाल दिया जाना चाहिए।

सदन में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने तिवारी की बात से सहमति जताते हुए कहा, ‘‘ नियम तो यहां तक है कि लोकसभा में अगर कोई सदस्य कुछ कहता है तो उस पर इस सदन में चर्चा नहीं होगी। और वह भी आसन की ओर से कहा जाए तो.... यह दुर्भाग्यपूर्ण है। मैं अगर सदन के बाहर कुछ कहूं तो उस पर भी सदन में चर्चा नहीं होगी।’’

खरगे ने कहा कि आसन की ओर से कल दी गई प्रतिक्रिया को कार्रवाई से निकाल कर यह मिसाल कायम करनी चाहिए कि सदन के बाहर जो कुछ भी बोला जाएगा उस पर सदन में बात नहीं होगी।

सदन के नेता पीयूष गोयल ने कहा कि विपक्ष के नेता भी ‘‘उनके प्रति पूरा सम्मान जाहिर करें जो पूरे देश का प्रतिनिधित्व करते हैं, लोकतांत्रिक तरीके से निर्वाचित हुए हैं और देश के उप राष्ट्रपति हैं। उनके बारे में कोई भी टिप्पणी सोच समझ कर की जानी चाहिए चाहे वह सदन में की जाए या बाहर की जाए।’’

सभापति धनखड़ ने कहा कि इस सदन का सभापति होने के नाते उन्हें उन आरोपों से गहरी पीड़ा हुई जो न्यायपालिका को संबद्ध करते हुए उन पर लगाए गए। उन्होंने कहा कि बात चाहे इस सदन की हो या उस सदन की, हर व्यक्ति सम्मान का अधिकारी है।

उन्होंने कहा कि वह इस सदन के सभापति हैं और सदन की गरिमा को बनाए रखना उनकी सर्वोच्च कोशिश होगी।

इसके बाद सभापति ने शून्यकाल आरंभ किया। बहरहाल, कांग्रेस सदस्य आसन की ओर से दी गई प्रतिक्रिया को कार्यवाही से निकालने की मांग करते हुए सदन से बहिर्गमन कर गए।

उल्लेखनीय है कि संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी ने बुधवार को पार्टी संसदीय दल की बैठक में आरोप लगाया था कि केंद्र सरकार सुनियोजित ढंग से न्यायपालिका के प्राधिकार को कमजोर करने का प्रयास कर रही है, जो बहुत ही परेशान करने वाला घटनाक्रम है।

संप्रग अध्यक्ष ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह जनता की नजर में न्यायपालिका की स्थिति को कमतर बनाने का प्रयास कर रही है।

इस पर बृहस्पतिवार को सदन में धनखड़ ने कहा था कि संप्रग अध्यक्ष का बयान उनके विचारों से पूरी तरह से भिन्न है और न्यायपालिका को कमतर करना उनकी सोच से परे है। उन्होंने कहा कि संप्रग अध्यक्ष का बयान पूरी तरह अनुचित है और लोकतंत्र में उनके विश्वास की कमी का संकेत देता है।

धनखड़ ने पूर्व में उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया से संबंधित राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) कानून को रद्द किए जाने को लेकर पिछले दिनों न्यायपालिका की आलोचना की थी और इसे "संसदीय संप्रभुता से समझौते" का उदाहरण बताया था।

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