देश की खबरें | राजस्थान में गुटबाजी पर लगाम कस कर संपन्न हुई कांग्रेस की यात्रा

अलवर (राजस्थान), 21 दिसंबर ‘भारत जोड़ो यात्रा’ का राजस्थान का पड़ाव बुधवार को समाप्त होने पर कांग्रेस ने राहत की सांस ली होगी क्योंकि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उनके चिर प्रतिंद्वद्वी माने जाने वाले सचिन पायलट के समर्थकों के बीच कोई टकराव हुए बिना राज्य में यह यात्रा संपन्न हुई। हालांकि, समर्थकों ने सड़कों पर नारेबाजी जरूर की थी।

राजस्थान में यात्रा के करीब 500 किलोमीटर के रास्ते में पायलट के गढ़ माने जाने वाले कई इलाके आए और पदयात्रा में लोगों का हुजूम उमड़ा जिनमें से कई उनके युवा समर्थक शामिल थे। इन युवा समर्थकों ने ‘‘हमारा सीएम कैसा हो, सचिन पायलट जैसा हो’’ और ‘‘आई लव यू, आई लव यू, सचिन पायलट, आई लव यू’’ जैसे नारे लगाए।

पायलट ने खुद ज्यादातर वक्त राहुल गांधी के साथ पदयात्रा की और कुछ मौकों पर उन्हें अपने समर्थकों को उनके समर्थन में नारे नहीं लगाने के लिए कहते हुए भी देखा गया।

गहलोत ने भी यात्रा में नियमित रूप से भाग लिया। खासतौर से राज्य में यात्रा के सुबह के सत्र के दौरान उन्हें अक्सर पदयात्रा करते हुए देखा गया। कुछ स्थानों पर गहलोत के समर्थकों ने उनके पक्ष में नारे भी लगाए और राज्य में उनके ‘‘सुशासन’’ का जिक्र किया।

यात्रा के 100 दिन पूर होने के मौके पर दौसा की सड़कों पर लोगों का हुजूम उमड़ा और कई लोग अपने घरों की छत पर खड़े होकर गांधी, गहलोत और पायलट का उत्साह बढ़ाते दिखे।

दौसा पायलट का गढ़ रहा है जहां बड़ी संख्या में उनके समर्थकों को यह कहते हुए सुना गया कि राज्य की बागडोर पायलट के हाथ में सौंपी जाए और केवल वही 2023 में कांग्रेस को सत्ता में वापस ला सकते हैं। गुर्जर समुदाय से आने वाले पायलट और उनके पिता दिवंगत राजेश पायलट दौसा से संसद में निर्वाचित होते रहे हैं।

दौसा में यात्रा में भाग ले रहे सुमेश गुर्जर ने ‘पीटीआई-’ से कहा, ‘‘अंदरुनी कलह पार्टी की संभावनाओं को नुकसान पहुंचा रही है। कांग्रेस को निर्णय लेना चाहिए और अगर पायलट को सम्मान नहीं दिया गया तो पार्टी 2023 के विधानसभा चुनावों में मुश्किल में आ जाएगी।’’

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