देश की खबरें | राज्यों से मिल रही शिकायत, लोग कोविड-19 संबंधी सावधानी अपनाने में बरत रहे ढिलाई: केंद्र
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, आठ सितंबर कोविड-19 संबंधी सावधानियां अपनाने में लोगों के ढिलाई बतरने को लेकर राज्यों से बार-बार मिल रही शिकायतों को रेखांकित करते हुए केंद्र ने मंगलवार को कहा कि महामारी की रोकथाम में भौतिक दूरी और मास्क पहनने जैसे कदम महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

नीति आयोग के सदस्य एवं कोविड-19 राष्ट्रीय कार्यबल के प्रमुख वी. के. पॉल ने एक प्रेस ब्रीफिंग में महामारी की रोकथाम में जांच के महत्व पर जोर दिया।

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उन्होंने कहा, ‘‘लोगों को जांच कराने से डरना नहीं चाहिए। यदि उन्हें लक्षण हैं तो उन्हें कोविड-19 संबंधी जांच कराने के लिए आगे आना चाहिए।’’

पॉल ने कहा कि जब कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में वृद्धि हो रही है तो सुरक्षा संबंधी सावधानियां अपनाने में लोगों के ढिलाई बरतने के बारे में राज्यों से बार-बार शिकायतें मिल रही हैं।

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उन्होंने कहा, ‘‘हमें राज्यों से बार-बार शिकायतें मिल रही हैं कि लोग सावधानी अपनाने में ढिलाई बरत रहे हैं।’’

अधिकारी ने कहा कि भौतिक दूरी का पालन करने, मास्क पहनने, हाथों को साफ रखने और भीड़भाड़ में जाने से बचने जैसे कदम संक्रमण की रोकथाम में महत्वपूर्ण हैं।

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने कहा कि भारत में प्रति 10 लाख की आबादी पर कोविड-19 के 3,102 मामले हैं जो दुनिया में सबसे कम हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘विश्व में प्रति 10 लाख की आबादी पर कोविड-19 संबंधी मौत के औसत 115 मामलों की तुलना में भारत में प्रति 10 लाख की आबादी पर कोविड-19 संबंधी मौत के मामलों की संख्या 53 है। यह भी दुनिया में सबसे कम है।’’

भूषण ने कोविड-19 के मामलों का राज्यवार आंकड़ा देते हुए कहा कि देश में कोविड-19 के कुल मामलों में से 70 प्रतिशत मामले केवल पांच राज्यों में हैं जिनमें महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश शामिल हैं। शेष 31.37 प्रतिशत मामले बाकी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से हैं।

अधिकारी ने उल्लेख किया, ‘‘कुल 28 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में कोविड-19 संबंधी मृत्यु दर राष्ट्रीय औसत 1.70 प्रतिशत से कम है।’’

उन्होंने कहा कि देश में कोरोना वायरस संक्रमण के उपचाराधीन मामलों में से 62 प्रतिशत मामले महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में हैं।

भूषण ने कहा, ‘‘14 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में पांच हजार से कम उपचाराधीन मामले हैं। लक्षद्वीप में कोई उपचाराधीन मामला नहीं है।’’

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