श्रीनगर, नौ अगस्त नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के नेता उमर अब्दुल्ला ने बुधवार को कहा कि केंद्र सरकार को संविधान के अनुच्छेद-370 के ज्यादातर प्रावधानों को निरस्त करने पर 'धमकी' देने के बजाय उच्चतम न्यायालय के फैसले का इंतजार करना चाहिए।
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन इस मामले पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कुछ नेताओं की टिप्पणियां 'लगभग' अदालत की अवमानना के समान हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब लोकसभा में केंद्र सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर बहस में हिस्सा लेते हुए केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा, ‘‘अनुच्छेद-370 को कभी बहाल नहीं किया जाएगा। ’’
उमर ने कहा कि उन्हें भाजपा के जिम्मेदार नेताओं की ऐसी टिप्पणी सुनकर आश्चर्य होता है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के नेता ने कहा, ‘‘यह मामला उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन है, शीर्ष अदालत को फैसला लेने दीजिए। वे उच्चतम न्यायालय को क्यों धमकी दे रहे हैं? एक केंद्रीय मंत्री ने आज संसद में ऐसी टिप्पणी की है कि वे ऐसा कभी नहीं होने देंगे। हम उच्चतम न्यायालय के फैसले का इंतजार कर रहे हैं, उन्हें भी करना चाहिए। क्या उन्हें लगता है कि उनका मामला इतना कमजोर है कि उन्हें धमकी देने की जरूरत महसूस होती है? यह खेदजनक है। यह लगभग अदालत की अवमानना के समान है।’’
यह पूछे जाने पर कि शीर्ष अदालत में वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल द्वारा दी गई दलीलों के बाद क्या कोई उम्मीद है, अब्दुल्ला ने कहा कि दलीलें मजबूत हैं, लेकिन सरकार ने अब तक कोई जवाब नहीं दिया है।
उन्होंने कहा, ‘‘ यह देखना होगा कि सरकार का जवाब कितना मजबूत होता है। मामले को आगे बढ़ने दीजिए, तभी हम इस पर चर्चा कर सकेंगे कि किसकी दलीलें बेहतर थीं। लेकिन, कपिल सिब्बल और गोपाल सुब्रमण्यम को पार्टी द्वारा दो याचिकाओं का प्रतिनिधित्व करने का एनसी का निर्णय सबसे अच्छा निर्णय रहा है, और शायद, हम अपना मामला इससे बेहतर तरीके से प्रस्तुत नहीं कर सकते थे। बाकी फैसला न्यायाधीशों और ईश्वर पर निर्भर है, लेकिन हम आशान्वित हैं।’’
उमर अब्दुल्ला ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘अगर कोई उम्मीद नहीं होती तो हम उच्चतम न्यायालय का रुख नहीं करते। हम उच्चतम न्यायालय गए क्योंकि हमें उम्मीद है। कम से कम हमने भाजपा की तरह शीर्ष अदालत को धमकी नहीं दी है। ’’
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