देश की खबरें | गुजरात के पुलिसकर्मियों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर जारी की गयी आचार संहिता
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

अहमदाबाद, 21 जुलाई गुजरात में पुलिस महानिदेशक शिवानंद झा द्वारा जारी ‘‘आचार संहिता’’ के तहत पुलिस कर्मियों और अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि इंटरनेट पर अपनी राजनीतिक राय व्यक्त नहीं करें और सरकार विरोधी किसी भी मुहिम से दूर रहें।

राज्य में पुलिसकर्मियों का वेतन बढ़ाने के लिए ऑनलाइन अभियान की पृष्ठभूमि में यह सख्त दिशा-निर्देश जारी किया गया है । इस अभियान को फेसबुक और ट्विटर जैसे मंचों पर बड़ी प्रतिक्रिया मिली है ।

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मौजूदा कानून के तहत सरकार के खिलाफ किसी भी सामग्री के छापने या प्रकाशन को लेकर पुलिस कर्मियों पर पाबंदी है लेकिन पहली बार ऐसा हुआ है कि सोशल मीडिया के इस्तेमाल के संबंध में विस्तृत आचार संहिता जारी की गयी है ।

डीजीपी झा ने मंगलवार को बताया कि वेतन वृद्धि के लिए ‘हिंसक आंदोलन’ में भागीदारी को लेकर पुलिसकर्मियों को गुमराह करने के संबंध में गांधीनगर में तीन लोगों के विरूद्ध मामला दर्ज किया गया।

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उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘ऐसे समय में जब राज्य और पुलिस बल कोरोना वायरस महामारी से निपटने में जुटे हुए हैं पुलिसकर्मियों को गुमराह करने के आरोप में तीन लोगों को हिरासत में लिया गया।’’

शीर्ष पुलिस अधिकारी ने बताया कि पूछताछ के बाद तीनों लोगों - कमलेश सोलंकी, भोजाभाई भारवाड़ और हसमुख सक्सेना को गिरफ्तार किया जाएगा ।

उन्होंने कहा कि ऑनलाइन स्तर पर इस तरह का अभियान चलाने के लिए जिम्मेदार लोगों के विरूद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

डीजीपी ने कहा कि ऐसे अभियान में भागीदारी करने वाले पुलिसकर्मियों को भी कार्रवाई का सामना करना होगा ।

नए नियमों के मुताबिक पुलिसकर्मियों और अधिकारियों को सोशल मीडिया पर किसी भी तरह की राजनीतिक टिप्पणी नहीं करनी चाहिए ।

इसमें कहा गया कि वे ऐसे किसी समूह या मंच का हिस्सा नहीं हो सकते जिसका गठन धर्म जाति, नस्ल या उपजाति के आंदोलन या इसे बढ़ावा देने के मकसद से किया गया है ।

खुफिया अधिकारियों को इससे छूट दी गयी है लेकिन इसके लिए उन्हें पहले अपने वरिष्ठ अधिकारियों से अनुमति लेनी होगी।

आचार संहिता में कहा गया है कि सरकार या सेवा मामलों में पुलिस बल की आलोचना वाला कोई पोस्ट सोशल मीडिया मंच पर नहीं डालनी चाहिए ।

इसी तरह सेवा संबंधी मामलों के बारे में कोई शिकायत ऑनलाइन स्तर पर जाहिर नहीं करनी चाहिए और पुलिस कर्मियों को अपने निजी विचार भी व्यक्त करने से रोका गया है ।

अधिकारियों समेत पुलिसकर्मियों को सलाह दी गयी है कि सोशल मीडिया से जुड़ाव के लिए इंटरनेट जैसे सरकारी संसाधन का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए । ड्यूटी के दौरान वे सोशल मीडिया का इस्तेमाल नहीं कर सकते।

निर्देश में कहा गया है कि अगर कोई पुलिसकर्मी निजी उद्देश्य के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल करता है तो उसे स्पष्ट करना होगा कि वह निजी हैसियत से ऐसा कर रहा है और गुजरात पुलिस विभाग के कर्मी के तौर पर नहीं ।

आचार संहिता में पुलिस कर्मियों और अधिकारियों को सोशल मीडिया पर शिष्ट का इस्तेमाल करने और धौंस जमाने या लोगों को परेशान नहीं करने की हिदायत दी गयी है ।

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