न्यूयॉर्क, चार सितंबर भारतीय मूल के एक वैज्ञानिक द्वारा किए गए अध्ययन के अनुसार जलवायु परिवर्तन की वजह से मॉनसून के स्वरूप में बदलाव प्राचीन सिंधु घाटी सभ्यता के उदय और पतन का कारण हो सकता है।
अध्ययन में उत्तर भारत के 5,700 वर्ष के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया।
यह भी पढ़े | बांग्लादेश: BNP सुप्रीमो खालिदा जिया की जेल से रिहाई की अवधि और 6 महीने बढ़ी.
अमेरिका स्थित रोचेस्टर इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आरआईटी) के निशांत मलिक ने अपने विश्लेषण में उत्तर भारत में प्राचीन काल में जलवायु के स्वरूप का अध्ययन करने के लिए एक नई गणितीय पद्धति का उपयोग किया।
‘चाओस: एन इंटरडिसीप्लिनरी जर्नल ऑफ नॉनलिनियर साइंस’ में प्रकाशित अनुसंधान रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिण एशिया में गुफाओं में जमा खनिज निक्षेप में विशेष रासायनिक अवस्थाओं की मौजूदगी का पता लगाकर वैज्ञानिक क्षेत्र में पिछले 5,700 साल तक की मॉनसून की बारिश का रिकॉर्ड बना सके।
हालांकि मलिक ने कहा कि जलवायु को समझने के लिए विशिष्ट रूप से इस्तेमाल गणितीय पद्धतियों के साथ प्राचीन जलवायु का अध्ययन करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है।
मलिक ने कहा कि सिंधु घाटी सभ्यता का पतन क्यों हुआ, इस बारे में अब तक अनेक मान्यताएं हैं।
हालांकि उन्होंने कहा कि अब तक किसी गणितीय प्रणाली से यह काम नहीं किया गया।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY