ताजा खबरें | विपक्षी दलों के शासन वाले राज्यों को परेशान कर रहा केंद्र : विपक्ष
Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. बेरोजगारी तथा अमीरों एवं गरीबों के बीच बढ़ती खाई को लेकर केंद्र सरकार को निशाने पर लेते हुए विपक्षी दलों के सदस्यों ने सोमवार को राज्यसभा में आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ‘संघवाद’ के सिद्धांतों को ताक पर रखकर उन राज्यों के साथ भेदभाव कर रही है, जहां उसकी पार्टी की सरकार नहीं है।
नयी दिल्ली, पांच फरवरी बेरोजगारी तथा अमीरों एवं गरीबों के बीच बढ़ती खाई को लेकर केंद्र सरकार को निशाने पर लेते हुए विपक्षी दलों के सदस्यों ने सोमवार को राज्यसभा में आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ‘संघवाद’ के सिद्धांतों को ताक पर रखकर उन राज्यों के साथ भेदभाव कर रही है, जहां उसकी पार्टी की सरकार नहीं है।
उच्च सदन में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए विपक्षी दलों के सदस्यों ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र की सरकार विपक्षी नेताओं को परेशान करने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का दुरूपयोग कर रही है। चर्चा में भाग लेते हुए तृणमूल कांग्रेस के सुखेन्दु शेखर राय ने कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण में ‘विकसित’ और ‘अमृत’ शब्दों का बार-बार उल्लेख किया गया है। उन्होंने कहा कि जो लोग ‘हलाहल’ पीकर जी रहे हैं, उन्हें यह अमृत शब्द बार-बार सुनकर लगता है कि कहीं वे परलोक में तो नहीं चले गये हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार ने हर वर्ष दो करोड़ नौकरी दिए जाने का वादा किया था और उसके अनुसार अभी तक बीस करोड़ नौकरी दी जा चुकी होती। उन्होंने सवाल किया कि सरकार ने अभिभाषण में इस बात को क्यों नहीं बताया कि अभी तक कितनी नौकरियां दी गयी? उन्होंने कहा, ‘‘क्या यह (नौकरी देने का वादा) भी एक जुमला था?’’
राय ने कहा कि संसद से 146 सांसदों को निलंबित कर कानून पारित किए गए। उन्होंने इस घटना की जर्मनी में हिटलर के शासन से तुलना करते हुए कहा कि भारत के संसदीय इतिहास में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ।
उन्होंने कहा कि सरकार के इस ’रिपोर्ट कार्ड (राष्ट्रपति अभिभाषण)’ में बड़े बड़े दावे किए गए हैं किंतु जमीन पर कुछ नहीं है। उन्होंने 15 जनवरी को जारी ऑक्सफेम रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि भारत में एक प्रतिशत संपन्न लोगों के पास देश की 40 प्रतिशत संपदा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार निगमित करों में कटौती कर रही है वहीं केंद्रीयकृत कर जीएसटी में बढ़ोत्तरी कर परिवारों पर परोक्ष करों का बोझ बढ़ा रही है।
तृणमूल सदस्य ने कहा कि भारत में महिलाओं की मेहनत पर जो आय होती है वह पुरूषों की आय की तुलना में एक रूपये पर 63 पैसे है। उन्होंने कहा कि भारत में अरबपतियों की संख्या में बढ़ी है।
राय ने यूएनडीपी की 15 जनवरी को जारी रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि देश की 10 प्रतिशत आबादी को देश की 57 प्रतिशत आय प्राप्त हो रही है। उन्होंने कहा कि देश की 10 प्रतिशत आबादी देश की 65 प्रतिशत संपदा को नियंत्रित करती है, जिससे देश में संपदा वितरण में भारी असमानता का पता लगता है।
उन्होंने कहा कि इस रिपोर्ट में प्रवासी मजदूरों के गरीबी रेखा से नीचे चले जाने की आशंका जताई गई है। उन्होंने कहा कि भारत में 35 प्रतिशत कार्यबल का वास्तविक वेतन 2014 से बिलकुल नहीं बढ़ा है। उन्होंने कहा कि इन समस्याओं के समाधान के लिए सरकार क्या कर रही है, इसके बारे में राष्ट्रपति के अभिभाषण में कोई उल्लेख या चर्चा नहीं की गयी है।
राय ने कहा कि सरकार पहले ‘सहयोगात्मक संघवाद’ का खूब उल्लेख करती थी किंतु अब वह इसकी कोई चर्चा नहीं करती क्योंकि अब यह ‘असहयोगात्मक संघवाद’ हो गया है।
तृणमूल सदस्य ने कहा कि जो राज्य विपक्षी दलों की सरकारों द्वारा शासित हैं, उनके नेताओं को केंद्रीय एजेंसियों के जरिये परेशान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों की सरकारों को विभिन्न तरह के हथकंडे अपना कर सत्ता से हटाया जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘यह प्रतिदिन हो रहा है और यहां तक कि एक दलित मुख्यमंत्री को भी नहीं छोड़ा गया। ’’
उन्होंने प्रश्न किया कि एक देश, एक चुनाव की बात कहां से आयी, क्या यह संविधान में है या इसकी सिफारिश निर्वाचन आयोग ने की है? उन्होंने कहा कि आश्चर्य की बात है कि एक पूर्व राष्ट्रपति की अध्यक्षता में एक समिति गठित कर इस काम को युद्धस्तर पर किया जा रहा है।
राय ने कहा कि यह दमनकारी सुझाव है और उनकी नेता ममता बनर्जी सहित विभिन्न विपक्षी दलों के नेताओं ने इससे असहमति जतायी है। उन्होंने कहा कि सरकार सरकारिया आयोग की सिफारिशें क्यों लागू नहीं कर रही है?
उन्होंने कहा कि केंद्र उनके राज्य पश्चिम बंगाल में ‘राजकोषीय आतंकवाद’ मचा रहा है। उन्होंने कहा कि उनके राज्य में 100 से अधिक बार केंद्रीय एजेंसियों को भेजा जा चुका है। उन्होंने कहा कि केंद्र ने पूरे देश में एकमात्र पश्चिम बंगाल राज्य को ही निशाना बनाया है। उन्होंने कहा कि राज्य के एक लाख 16 हजार करोड़ रूपये रोक दिये गये हैं। उन्होंने दावा किया कि यह ‘आर्थिक नाकेबंदी है और वे गरीब लोगों को मारना चाहते हैं। यह राजकोषीय आतंकवाद है।’
चर्चा में भाग लेते हुए द्रमुक के तिरूचि शिवा ने कहा कि यह सरकार ‘संघवाद विरोधी, किसान विरोधी, गरीब विरोधी, अमीर समर्थक’ है। उन्होंने कहा कि इस सरकार के सत्ता में आने के बाद क्षेत्रीय दलों पर तीखे प्रहार हुए हैं।
शिवा ने कहा कि यह सरकार क्षेत्रीय दलों के शासन वाले राज्यों के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। उन्होंने दावा किया कि तमिलनाडु देश में सबसे अधिक प्रत्यक्ष कर देने वाला राज्य है किंतु उसे एक रूपये कर देने पर मात्र 29 पैसा मिलता है जबकि उत्तर प्रदेश को एक रूपये कर देने पर दो रूपये 73 पैसे मिलते हैं। उन्होंने कहा कि यह भेदभाव आखिर क्यों है?
उन्होंने कहा कि एक नागरिक एवं एक सांसद के रूप में देश की सच्चाई बताना उनका दायित्व है। उन्होंने कहा कि जी-20 के देशों में सबसे कम प्रति व्यक्ति आय भारत की है जबकि चीन की आबादी इतनी अधिक होने के बावजूद उसकी प्रति व्यक्ति आय कहीं अधिक है।
शिवा ने कहा, ‘‘महात्मा गांधी ने ग्राम्य भारत की परिकल्पना की थी, पंडित नेहरू ने आधुनिक भारत का निर्माण किया था, लालबहादुर शास्त्री ने किसान भारत बनाने का प्रयास किया, वी पी सिंह ने सामाजिक न्याय भारत बनाने का प्रयास किया, मनमोहन सिंह ने वैश्वीकृत भारत बनाया और माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी गैर संघवाद बनाने के प्रयास में लगे हुए हैं।’’
जारी माधव ब्रजेन्द्र मनीषा
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(The above story first appeared on LatestLY on Feb 05, 2024 02:28 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

