नयी दिल्ली, आठ मई उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को केन्द्र से कहा कि कोविड-19 महामारी के बीच सऊदी अरब में फंसी गर्भवती चिकित्सकों और नर्सों को वापस लाने के लिये और प्राथमिकता देने पर विचार किया जाये।
न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति बी आर गवई की पीठ ने यह टिप्पणी उस वक्त की जब सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मानक प्रक्रिया के तहत विदेश से भारतीयों को लाने के मामले में इन महिलाओं को पहले ही प्राथमिकता दी जा चुकी है।
पीठ, केंद्र को इन महिलाओं को यथाशीघ्र वापस लाने का बंदोबस्त करने का निर्देश देने के लिये दायर याचिका पर वीडियो कांफ्रेन्सिग के माध्यम से सुनवाई कर रही थी।
इस याचिका में कहा गया है कि सऊदी अरब में फंसी गर्भवती डाक्टर और नर्सों को कोविड-19 महामारी के संक्रमण का शिकार होने का खतरा ज्यादा है, इसलिए इन्हें प्राथमिकता के आधार पर स्वदेश लाने की व्यवस्था करना जरूरी है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता इन्दिरा जयसिंह ने पीठ से कहा कि ये डाक्टर और नर्सें गर्भावस्था के अंतिम दिनों के नजदीक हैं और एक बार अगर वे 36वें सप्ताह में प्रवेश कर गयीं तो उनके लिये यात्रा करना मुश्किल हो जायेगा। उन्होंने इन सभी को दी गयी प्राथमिकता को और ज्यादा वरीयता देने का अनुरोध किया।
इन सभी का कहना है कि उन्होंने काफी पहले ही भारत आने की योजना बनाने के साथ ही अपने टिकट बुक कराये थे लेकिन विदेशों से आने वाली उड़ानों के लिये भारत के हवाईअड्डे बंद होने की वजह से उन्हें अपने टिकट रद्द कराने पड़ गये हैं।
अनूप
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