नयी दिल्ली, सात नवंबर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने कथित तौर पर फर्जी जाति प्रमाण-पत्र का इस्तेमाल कर नौकरी और अनुसूचित जनजाति वर्ग के तहत घर हासिल करने पर एमटीएनएल के एक सेवानिवृत्त कर्मचारी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि यह प्रमाण-पत्र 44 साल पहले जारी किया गया था।
अधिकारियों ने कहा कि एजेंसी ने रमेश चंद मीणा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है जो तीन दशक से ज्यादा समय तक सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम में सेवा देने के बाद 2018 में वरिष्ठ प्रबंधक के पद से सेवानिवृत्त हुए थे।
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उन्होंने कहा कि अनुसूचित जनजाति (एसटी) का प्रमाण-पत्र 1976 में राजस्थान के भरतपुर में एसडीएम स्तर के एक अधिकारी द्वारा जारी किया गया था जो उस समय क्षेत्र में तैनात ही नहीं थे।
मीणा ने महानगर टेलिफोन निगम लिमिटेड (एमटीएनएल) में नौकरी के लिये कथित रूप से प्रमाण-पत्र का इस्तेमाल किया और एसटी कोटे के तहत पश्चिमी दिल्ली के विकासपुरी इलाके में डीजी-1 मुहल्ले में 1987 में फ्लैट हासिल कर लिया।
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उन्होंने कहा कि 1994 में विभागीय परीक्षा में उसे कनिष्ठ टेलिकॉम अधिकारी के तौर पर प्रोन्नत कर दिया गया।
सीबीआई के मुताबिक मीणा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हाथरस का रहने वाला है जहां उसके पूर्वजों की जमीन है।
अधिकारियों ने कहा कि एजेंसी ने पाया कि भरतपुर के डीग के उपजिलाधिकारी द्वारा 10 सितंबर 1976 को जारी प्रमाण-पत्र पर कोई क्रमांक नहीं है।
उन्होंने कहा कि जिस अधिकारी के हस्ताक्षर के कथित तौर पर यह प्रमाण-पत्र जारी हुआ वह उस अवधि के दौरान कभी वहां तैनात ही नहीं रहे।
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