जरुरी जानकारी | केयर्न ने पूर्व की तथि से कराधान के कारण 1.4 अरब डॉलर के नुकसान की भरपाई की मांग की

नयी दिल्ली, 29 सितंबर ब्रिटेन की तेल खोज कंपनी केयर्न एनर्जी ने मंगलवार को कहा कि वह पूर्व की तथि से कर मांग को लेकर उसके निवेश को जब्त किये जाने से हुए नुकसान को लेकर भारत सरकार से 1.4 अरब डॉलर (करीब 10,300 करोड़ रुपये) की मांग कर रही है।

कंपनी ने अपनी छमाही वित्तीय परिणाम से जुड़े बयान में कहा कि उसे उम्मीद है कि अंतररष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण जल्दी ही उसके मामले में फैसला सुनाएगा। कंपनी ने न्यायाधिकरण के समक्ष भारत सरकार की पूर्व की तिथि से 10,247 करोड़ रुपये की मांग को चुनौती दी है।

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कंपनी ने कहा, ‘‘ब्रिटेन-भारत द्वद्विपक्षीय निवेश संधि के तहत केयर्न के दावे पर सुनवाई अगस्त 2018 में हुई। अंतिम सुनवाई दिसंबर 2018 में हुई। सभी औपचारिक सुनवाई और जरूरी सूचना दी जा चुकी है। न्यायाधिकरण अब फैसला लिखने की प्रक्रिया में है।’’

केयर्न एनर्जी के अनुसार न्यायाधिकरण ने 2020 में गृष्म ऋतु के बाद निर्णय सुनाने का संकेत दिया है।

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कंपनी ने कहा कि वह 1.4 अरब डॉलर से अधिक के नुकसान की क्षतिपूर्ति की मांग कर रही है। उसे यह नुकसान पूर्व की तिथि से कर प्रावधान लागू किये जाने की वजह से भारत में 2014 में निवेश जब्त किये जाने के कारण हुआ। इसके कारण कंपनी तथा उसके निवेश के साथ निष्पक्ष और समान रूप से व्यवहार नहीं किया गया।

यह दूसरा सर्वाधिक चर्चित पूर्व की तिथि से कर लगाये जाने का मामला है। पिछले सप्ताह एक अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण ने यह व्यवस्था दी कि भारत का वोडाफोन ग्रुप से पूर्व की तिथि से 22,100 करोड़ रुपये का कर मांगना दक्षिण एशियाई देश और नीदरलैंड के बीच द्विपक्षीय निवेश संरक्षण समझौते के तहत निष्पक्ष कर व्यवहार का उल्लंघन है।

देश को सबसे बड़ा तेल खोज क्षेत्र देने वाली केयर्न को आयकर विभाग से जनवरी 2014 में नोटिस मिला था। उसमें 2006 में समूह के पुनर्गठन के मामले में प्रारंभिक अनुमान के तहत 10,247 करोड़ रुपये कर की मांग की गयी थी।

विभाग ने इस मांग के साथ कंपनी की पूर्व अनुषंगी केयर्न इंडिया में उसकी करीब 10 प्रतिशत हिस्सेदारी को कुर्क कर लिया था।

केयर्न एनर्जी ने 2010-11 में केयर्न इंडिया वेदांता को बेच दी। केयर्न इंडिया और वेदांता के अप्रैल 2017 में विलय के बाद ब्रिटेन की कंपनी की केयर्न इंडिया में हिस्सेदारी को वेदंता में करीब 5 प्रतिशत शेयरधारित से बदला गया था।

कर विभाग ने वेदांता में कंपनी के शेयर कुर्क करने के अलावा 1,140 करोड़ रुपये का लाभांश भी जब्त किया था। यह लाभांश उस शेयरधारित के एवज में उसे मिलना था। इसके साथ मांग के एवज में 1,590 करोड़ रुपये का कर रिफंड का निपटान किया था।

केयर्न एनर्जी ने 2015 में पूर्व की तिथि से कराधान मामले को अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण में चुनौती दी।

मामला लंबित होने के बीच कर विभाग ने कर मांग की वसूली के लेकर केयन एनर्जी के वेदांता में ज्यादातर शेयर बेच दिये।

कंपनी ने मंगलवार को कहा, ‘‘विस्तृत कानूनी परामर्श के आधार पर केयर्न को भरोसा है कि वह मध्यस्थता मामले में सफल होगी...।’’

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