नयी दिल्ली, 31 जुलाई केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बृहस्पतिवार को खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना (पीएमकेएसवाई) के लिए बजटीय परिव्यय 1,920 करोड़ रुपये बढ़ाकर 6,520 करोड़ रुपये करने की मंजूरी दे दी।
चालू वित्त वर्ष (2025-26) में प्रदान की जाने वाली बढ़ी हुई धनराशि का उपयोग 50 बहु-उत्पाद खाद्य विकिरण इकाइयों और 100 खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाओं के लिए किया जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) की बैठक में इस संबंध में निर्णय लिया गया।
मंत्रिमंडल की बैठक के बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संवाददाताओं को बताया, “पीएमकेएसवाई का परिव्यय बढ़ाकर 6,520 करोड़ रुपये कर दिया गया है।”
साल 2017 में शुरू पीएमकेएसवाई को 4,600 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ चालू वित्त वर्ष 2025-26 के अंत तक एक और वर्ष के लिए बढ़ा दिया गया है।
बृहस्पतिवार को, मंत्रिमंडल ने 2024-25 के बजट में 50 बहु-उत्पाद खाद्य विकिरण इकाइयों और 100 खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाओं की स्थापना की घोषणा को लागू करने के लिए आवंटन में 1,920 करोड़ रुपये की वृद्धि करने का निर्णय लिया।
इसमें से लगभग 1,000 करोड़ रुपये का उपयोग पीएमकेएसवाई की घटक योजना आईसीसीवीएआई (एकीकृत कोल्ड चेन और मूल्य संवर्धन अवसंरचना) के तहत 50 बहु-उत्पाद खाद्य विकिरण इकाइयों और घटक योजना एफएसक्यूएआई (खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता आश्वासन अवसंरचना) के तहत 100 प्रयोगशालाओं की स्थापना के लिए किया जाएगा।
पंद्रहवें वित्त आयोग चक्र (2021-22 से 2025-26) के दौरान पीएमकेएसवाई की विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत परियोजनाओं को मंजूरी देने के लिए लगभग 920 करोड़ रुपये का उपयोग किया जाएगा।
आईसीसीवीएआई और एफएसक्यूएआई, दोनों ही पीएमकेएसवाई की मांग-आधारित योजनाएं हैं।
एक अलग बयान में, सरकार ने कहा कि देश भर की पात्र इकाइयों से प्रस्ताव आमंत्रित करने के लिए रुचि पत्र (ईओआई) जारी किए जाएंगे। रुचि पत्र के अंतर्गत प्राप्त प्रस्तावों को मौजूदा योजना दिशानिर्देशों के तहत पात्रता मानदंडों के अनुसार उचित जांच के बाद अनुमोदित किया जाएगा।
प्रस्तावित 50 बहु-उत्पाद खाद्य विकिरण इकाइयों के कार्यान्वयन से सालाना 20 से 30 लाख टन तक की कुल परिरक्षण क्षमता सृजित होने की उम्मीद है, जो इन इकाइयों के अंतर्गत विकिरणित किए जाने वाले खाद्य उत्पादों के प्रकार पर आधारित होगी।
निजी क्षेत्र में प्रस्तावित 100 एनएबीएल-मान्यता प्राप्त खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाओं की स्थापना से खाद्य नमूनों के परीक्षण के लिए उन्नत बुनियादी ढांचे का विकास होगा, जिससे खाद्य सुरक्षा मानकों का अनुपालन और सुरक्षित खाद्य आपूर्ति सुनिश्चित होगी।
मंत्री ने कहा, “विकिरण से कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने, अंकुरण, पकने, सूक्ष्मजीवी संदूषण को रोकने और शेल्फ लाइफ बढ़ाने में मदद मिलती है।”
उन्होंने कहा कि अधिक खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाओं के होने से नमूना विश्लेषण में लगने वाला समय कम होता है, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मानकों का अनुपालन बेहतर होता है और निर्यात को बढ़ावा मिलता है।
प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों का निर्यात पांच अरब डॉलर से दोगुना होकर 11 अरब डॉलर हो गया है। उन्होंने बताया कि कृषि निर्यात में प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की हिस्सेदारी 14 प्रतिशत से बढ़कर 24 प्रतिशत हो गई है।
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