देश की खबरें | बंबई उच्च न्यायालय ने महिला पर हमला करने वाले व्यक्ति की सजा घटायी
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

मुम्बई, आठ अगस्त बंबई उच्च न्यायालय ने उम्रकैद की सजा पाये एक व्यक्ति द्वारा दंड में कमी का आग्रह करते हुए दायर की गयी गयी याचिका पर कहा है कि महिलाओं के विरूद्ध अपराध के सामाजिक प्रभाव की अनदेखी नहीं की जा सकती है और ऐसे विषयों में अनुकरणीय बर्ताव जरूरी है।

शादी के प्रस्ताव से इनकार करने पर एक महिला पर चाकू से हमला करने के जुर्म में अरुमुगम अरूणदतियार नामक व्यक्त को निचली अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनायी थी। उसने उच्च न्यायालय पहुंचकर उससे सजा कम करने का अनुरोध किया था।

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उसे भादंसं की धाराओं 307 (हत्या के प्रयास) और 341 (गलत तरीके से बंधक बनाने) के तहत दोषी ठहराया गया था।

उसकी अर्जी पर न्यायमूर्ति एस. एस. शिंदे और न्यायमूर्ति एम. एस. कार्णिक की पीठ ने सुनवाई की।

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पीठ ने कहा कि जिन परिस्थितियों में यह वारदात हुई उनका ध्यान रखते हुए अदालत द्वारा प्रासंगिक परिस्थिति के साथ नाजुक संतुलन करना होता है। अदालत ने कहा कि ऐसा संतुलन बनाना बहुत मुश्किल काम है साथ ही, महिलाओं के विरूद्ध अपराध के सामाजिक प्रभाव की अनदेखी नहीं की जा सकती है और ऐसे विषयों में अनुकरणीय बर्ताव जरूरी है।

लेकिन पीठ ने कहा कि संपूर्ण रूप से परिस्थिति पर गौर करने से ऐसा जान पड़ता है कि उम्रकैद ‘कुछ ज्यादा ही कठोर’ है और 10 साल सश्रम करावास इंसाफ के लिए पर्याप्त है।

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