नयी दिल्ली, 12 जनवरी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री द्वारा रामचरितमानस पर विवादास्पद टिप्पणी करने को लेकर बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की आलोचना की और आरोप लगाया कि उनकी सरकार हिंदुओं की भावनाओं को आहत कर रही है।
पार्टी ने यह सवाल भी उठाया कि रामचरितमानस के खिलाफ टिप्पणी करने वाले नेता क्या अन्य धर्म की पवित्र पुस्तकों के खिलाफ भी टिप्पणी करने की हिम्मत दिखा सकते हैं।
बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर यादव ने यह कहकर विवाद खड़ा कर दिया है कि संत गोस्वामी तुलसीदास द्वारा लिखित रामचरितमानस समाज में "नफरत" फैलाती है। उन्होंने दावा किया कि इसका कुछ हिस्सा पिछड़ी जातियों को निशाना बनाता है।
उन्होंने कहा कि मनु स्मृति, रामचरितमानस और बंच ऑफ थॉट्स (आरएसएस विचारक एमएस गोलवलकर द्वारा लिखित) ने समाज में 'घृणा' को बढ़ावा दिया है।
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली बिहार सरकार ने हिंदुओं का अपमान करने के लिए मंत्री का इस्तेमाल किया है।
उन्होंने कहा, "वोट बैंक की राजनीति के लिए हिंदुओं को कब तक गाली दी जाएगी। क्या वह कुरान पर इसी तरह की टिप्पणी करने की हिम्मत कर सकते हैं?"
सिंह ने कहा कि हिंदू अपनी पवित्र ग्रंथों को अपमानित करने वाली ऐसी टिप्पणियों को बर्दाश्त नहीं करेंगे।
भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने चंद्रशेखर पर निशाना साधते हुए उन्हें "मार्क्सवादी मानसिकता" में डूबा अनपढ़ बताया और कहा कि उन्हें देश की परंपराओं और विरासत के बारे में कोई जानकारी नहीं है।
उन्होंने कहा, "नीतीश कुमार चुप क्यों हैं? उन्हें जवाब देना चाहिए। अगर भगवान राम का अपमान किया जाता है तो देश बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्हें मंत्री का इस्तीफा लेना चाहिए और देश की भावनाओं को आहत करने के लिए माफी मांगनी चाहिए।"
प्रसाद ने कुमार पर उनकी प्रतिक्रिया के लिए भी निशाना साधा कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें (नीतीश) इस मुद्दे के बारे में पता नहीं है तो वह किस तरह के मुख्यमंत्री हैं।
बिहार सरकार में सहयोगी कांग्रेस ने भी मंत्री की आलोचना करते हुए उनकी टिप्पणी को पूरी तरह से अस्वीकार्य बताया।
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