मुंबई, 13 मार्च : भारत में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों द्वारा इन दस्तावेजों को हासिल करने के लिए कड़े मानदंडों की घोषणा की. यह घोषणा ऐसे आरोपों के बीच की गई है कि कुछ बांग्लादेशी नागरिकों ने जाली दस्तावेज प्रस्तुत किए थे.
मंत्री ने कहा, “जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र महत्वपूर्ण दस्तावेज हैं, लेकिन इनका दुरुपयोग भी होता है. इस चलन को रोकने के लिए मानदंडों में बदलाव किया गया है. अब कोई भी प्रावधानों का दुरुपयोग नहीं कर सकेगा और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाएगा." भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता किरीट सोमैया ने दावा किया है कि जाली दस्तावेजों के आधार पर बांग्लादेशी नागरिकों को 3,997 जन्म प्रमाण पत्र जारी किए गए थे, जिसके कारण मालेगांव (नासिक जिला) में दो अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया था. बावनकुले ने कहा कि फर्जी जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है. यह भी पढ़ें : त्रिपुरा सरकार महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए काम कर रही: मुख्यमंत्री माणिक साहा
लोक स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी सरकारी संकल्प (जीआर) के अनुसार, जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए एक वर्ष से अधिक पुराने अनुरोध प्राप्त होने पर रजिस्ट्रार, जिलाधिकारी, उप-मंडल जिला मजिस्ट्रेट या कार्यकारी मजिस्ट्रेट, या जिलाधिकारी द्वारा अधिकृत अधिकारी, आवेदन को सत्यापित करेंगे.
विलंब शुल्क के बाद प्रमाण पत्र जारी करना होगा. इसमें कहा गया है कि प्रमाण पत्र जारी करने से पहले पोस्टमार्टम रिपोर्ट, प्राथमिकी, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं या संबंधित अधिकारियों के बयान, अस्पताल पंजीकरण विवरण या किसी ]आधिकारिक रिकॉर्ड जैसे सबूतों का सत्यापन किया जाना चाहिए.













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