नयी दिल्ली, दो फरवरी सरकार ने तमिलनाडु के समुद्री इलाके में चार गीगावाट क्षमता की पवन ऊर्जा परियोजनाओं के विकास के लिए बोलियां आमंत्रित की हैं।
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) ने शुक्रवार को एक बयान में यह जानकारी दी। इसके मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धी बोली के जरिये अपतटीय पवन ऊर्जा परियोजनाओं के विकास के लिए खुली पहुंच के आधार पर एक-एक गीगावाट क्षमता के चार ब्लॉक के लिए बोलियां मंगाई गई हैं।
बयान के मुताबिक, "सरकार तमिलनाडु के तट के पास चार गीगावाट क्षमता की अपतटीय पवन ऊर्जा परियोजनाओं के लिए बोलियां आमंत्रित करती है।"
ये बोलियां इंडियन सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन (एसईसीआई) के जरिये आमंत्रित की गई हैं। इसके लिए सभी आवश्यक पर्यावरणीय मंजूरियां ली जा चुकी हैं।
मंत्रालय ने कहा कि हरेक ब्लॉक के लिए बोली जीतने वाली कंपनी एक गीगावाट की अपतटीय पवन ऊर्जा क्षमता स्थापित करेंगे। वे खुली पहुंच व्यवस्था के तहत यह बिजली सीधे उपभोक्ताओं को बेचेंगी।
इसके साथ ही मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि खुली पहुंच वाली बोलियों में कोई व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (वीजीएफ) नहीं होता है। इन परियोजनाओं से पैदा होने वाली नवीकरणीय ऊर्जा को उद्योगों को बेचा जाएगा।
मंत्रालय के मुताबिक, अपतटीय पवन टर्बाइन लगाने के कई फायदे हैं। इनमें भूमि की उपलब्धता की बाधा नहीं होती हैं और क्षमता का भी अधिक उपयोग होता है। इसके अलावा अपतटीय पवन टर्बाइन की दक्षता तटीय पवन टर्बाइन की तुलना में अधिक होती है।
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