देश की खबरें | रक्षात्मक रवैये को छोड़कर बजरंग मानसिक मजबूती से रिंग में उतरने को तैयार

नयी दिल्ली, 20 जून सुबह के आठ बज रहे हैं और 90 मिनट के सत्र के बाद एक-एक कर के सभी पहलवान ट्रेनिंग हॉल से बाहर निकल रहे हैं लेकिन बजरंग पूनिया अभी और पसीना बहाने की तैयारी कर रहे हैं।

पसीने से तर-बतर बजरंग शरीर में लचीलापन और मांसपेशियों को मजबूत बनाने के लिए अगले 45 मिनट तक ‘प्लियोमेट्रिक’ कसरत का सहारा लेंगे। इस तरह की कसरत से एथलीट अपने शरीर की ताकत बढ़ाने के साथ लचीलापन लाने की कोशिश करता है। 

उनकी नयी ऊर्जा और उत्साह का कारण पिछले दिनों हुई कुछ जांच के उत्साहजनक परिणाम हैं। ‘टेक्नोबॉडी असेसमेंट’, ‘फंक्शनल मूवमेंट स्क्रीनिंग बॉडी कंपोजिशन एनालिसिस’ और ‘वीओ2एमएएक्स’ जैसी जांच के परिणामों ने उन्हें अपनी ‘मानसिकता’ को मजबूत करने में मदद की है।

तोक्यो ओलंपिक से पहले घुटने की चोट के कारण बजरंग ने अपने खेल में रक्षात्मक रवैया अपना लिया था। इस चोट के कारण उनकी मानसिकता प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी पर आक्रमण करने की जगह खुद का बचाव करने की हो गयी थी।

राष्ट्रमंडल खेलों के ट्रायल में भी ऐसा ही देखने को मिला जहां वह अपने प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ियों को कड़े मुकाबले के बाद हरा सके। इसके कुछ दिनों के बाद अल्माटी में बोलत तुर्लिखानोव कप में उन्हें उज्बेकिस्तान के अब्बोस राखमोनोव के खिलाफ बेहतर स्थिति में होने के बाद भी मुकाबला गंवाना पड़ा।

यह सब उनकी रक्षात्मक रणनीति के कारण था। ऐसा लगने लगा था कि बजरंग ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर लिया है। खुद बजरंग को भी अपनी काबिलियत पर शक होने लगा था।

बजरंग ने पीटीआई- को दिये साक्षात्कार में कहा, ‘‘मैंने अपने कोच से कहा कि मैं पुराने अंदाज में खेलूंगा और आक्रामक रवैया अपनाउंगा लेकिन अल्माटी में मेरे शरीर ने साथ नहीं दिया। मेरे प्रयास में कोई कमी थी, बल्कि मैं अधिक कोशिश कर रहा था लेकिन प्रदर्शन और नतीजे मेरे हक में नहीं आ रहे थे।

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