नयी दिल्ली, 15 फरवरी यहां की एक अदालत ने महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख को कथित तौर पर क्लीनचिट देने वाली जांच एजेंसी की प्रारंभिक जांच (पीई) रिपोर्ट लीक करने के आरोपी सीबीआई के पूर्व उपनिरीक्षक अभिषेक तिवारी को जमानत दे दी है।
विशेष अदालत के न्यायाधीश संजीव अग्रवाल ने यह कहते हुए तिवारी को जमानत प्रदान की कि इस मामले में करीब-करीब समान भूमिका वाले सह-आरोपी - देशमुख के वकील आनंद डागा और उनके सोशल मीडिया मैनेजर गजेन्द्र तुमाने- को पहले ही जमानत दी जा चुकी है।
अदालत ने गत 11 फरवरी को जारी अपने आदेश में तिवारी को एक लाख रुपये के जमानती बॉन्ड और इतनी ही राशि के एक मुचलके की शर्त पर जमानत दी। अदालत ने इस बात का भी संज्ञान लिया कि अभियुक्त करीब पांच महीने से न्यायिक हिरासत में हैं।
न्यायाधीश ने पूर्व उपनिरीक्षक को यह भी निर्देश दिया कि वह जरूरत पड़ने पर जांच एजेंसी के समक्ष उपस्थित होंगे और अदालत की पूर्व-अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ेंगे।
अदालत ने याचिकाकर्ता को सबूतों से छेडछाड़ न करने का भी पूर्व उपनिरीक्षक को निर्देश दिया है।
गत वर्ष 29 अगस्त को सीबीआई की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट कथित तौर पर मीडिया में लीक हो गयी थी। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया था कि जांच एजेंसी इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि अनिल देशमुख ने कोई संज्ञेय अपराध नहीं किया।
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