नयी दिल्ली, 28 अगस्त छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर बस्तर के नगरनार में एनएमडीसी के निर्माणाधीन इस्पात संयंत्र के निजीकरण के फैसले पर फिर से विचार करने का आग्रह किया है।
बुधवार को प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में बघेल ने कहा कि निजीकरण के कदम से लाखों आदिवासियों की उम्मीदों को गहरा धक्का लगेगा और नक्सली स्थिति का अनुचित लाभ उठा सकते हैं।
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एनएमडीसी इस्पात मंत्रालय के तहत आती है और देश की सबसे बड़ा लौह अयस्क खननकर्ता कंपनी है। वह नगरनार में तीस लाख टन प्रति वर्ष की क्षमता का अपना पहला इस्पात संयंत्र स्थापित कर रही है। यह संयंत्र निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (डीआईपीएएम) द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों की उस सूची में शामिल है, जिनका विनिवेश किया जाना है। हालांकि, इकाई के चालू होने तक इसके विनिवेश के प्रस्ताव को बाद में एक अंतर-मंत्रालयी समूह द्वारा स्थगित कर दिया गया।
पत्र में, मुख्यमंत्री ने संयंत्र के निजीकरण की केंद्र की योजना के संबंध में मोदी को राज्य की स्थिति से अवगत कराया। इस पत्र में बघेल ने कहा कि केंद्र द्वारा 20 हजार करोड़ रुपये की लागत से बनाये जा रहे संयंत्र के निजीकरण की योजना को लेकर स्थानीय लोगों में असंतोष है। उन्होंने केंद्र से फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया।
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मुख्यमंत्री ने लिखा, ‘‘संयंत्र के निजीकरण की खबरों ने आदिवासी समुदाय को आंदोलित कर दिया है और उनके बीच शासन व प्रशासन के प्रति असंतोष की भावना है।’’
उन्होंने आगे कहा, ‘‘राज्य सरकार काफी प्रयासों के साथ नक्सल गतिविधियों पर अंकुश लगाने में सफल रही है। लेकिन, इन परिस्थितियों में, नगरनार इस्पात संयंत्र के निजीकरण के कारण आदिवासी असंतोष का अनुचित लाभ उठाने वाले नक्सलियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।’’
पत्र में कहा गया है कि केंद्र सरकार को नगरनार संयंत्र को सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम के रूप में जारी रहने देना चाहिये, ताकि यह बस्तर क्षेत्र के आदिवासियों के जीवन स्तर को सुधारने में मदद करे। बघेल ने कहा कि राज्य इस बात को लेकर बेहद उत्साहित था कि संयंत्र के शुरू होने से न केवल बस्तर में खनिजों का उपयोग सुनिश्चित होगा बल्कि राष्ट्र निर्माण में योगदान करने का अवसर भी मिलेगा।
उन्होंने कहा, यह भी उम्मीद थी कि औद्योगिक इकाई हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर प्रदान करेगी। छत्तीसगढ़ के लिए यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण होगा कि राज्य के जनजातीय क्षेत्र में प्रस्तावित सार्वजनिक क्षेत्र के इस्पात संयंत्र का निजीकरण किया जायेगा।
इस बीच, एनएमडीसी ने शेयर बाजारों को सूचित किया है कि 27 अगस्त को हुई एक बैठक में उसके निदेशक मंडल ने एनएमडीसी लौह एवं इस्पात संयंत्र (एनआईएसपी), नगरनार को अलग करने के प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। कंपनी के एक अधिकारी ने बताया, ‘‘एनआईएसपी एनएमडीसी का इस्पात कारोबार है। नगरनार परियोजना एनआईएसपी के तहत है। निदेशक मंडल ने इसे मूल कंपनी से अलग करने को मंजूरी दे दी है।’’
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