देश की खबरें | आजम खान के कथित सहयोगी को सभी 26 मामलों में जमानत मिली

प्रयागराज, 17 सितंबर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पूर्व पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) आले हसन खान के खिलाफ रामपुर में दर्ज सभी 26 मामलों में उसे जमानत दे दी।

इन प्राथमिकियों में आरोप लगाया गया था कि आले हसन ने पूर्व मंत्री आजम खान के साथ मिलकर जौहर विश्वविद्यालय के लिए अवैध रूप से जमीन हथियाने में मदद की।

राजस्व अधिकारी और किसानों द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी में आरोप लगाया गया कि पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान और सीओ (नगर) आले हसन खान ने मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के पक्ष में बैनामा कराने के लिए किसानों पर दबाव बनाया। साथ ही इन्होंने झूठे मामलों में फंसाने की किसानों को धमकी भी दी थी। किसानों को एक दिन के लिए हवालात में भी डालने का भी इन पर आरोप है।

आले हसन खान द्वारा सभी 26 मामलों में दायर जमानत याचिका को शुक्रवार को स्वीकार करते हुए न्यायमूर्ति राजबीर सिंह ने कहा, “इन सभी मामलों की प्राथमिकी करीब 14-15 साल देर से दर्ज कराई गई है जिसमें कथित घटनाओं की कोई तिथि, समय या स्थान का उल्लेख नहीं है।”

अदालत ने कहा, “ऐसा कोई आरोप नहीं है कि याचिकाकर्ता के कब्जे में विवादित भूमि का कोई खंड है। आरोपी याचिकाकर्ता के पक्ष में कोई बैनामा नहीं कराया गया। साथ ही आरोपी ना तो उक्त ट्रस्ट का संस्थापक है और ना ही ट्रस्टी या सदस्य है।”

अदालत ने आगे कहा, “यह भी दर्शाया गया है कि मुख्य सह आरोपी मोहम्मद आजम खान को पहले ही जमानत मिल चुकी है। वहीं याचिकाकर्ता सात मई, 2023 से जेल में निरुद्ध है। सभी मामलों की जांच पूरी हो चुकी है और आरोप पत्र अदालत में दाखिल किये जा चुके हैं। इसलिए, इन मामलों के गुण दोष पर कोई विचार प्रकट किए बगैर जमानत का मामला बनता है।”

इससे पूर्व, याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी थी कि राजनीतिक द्वेष की वजह से कई वर्षों के बाद याचिकाकर्ता के खिलाफ ये प्राथिमिकी दर्ज की गईं। याचिकाकर्ता पहले ही 30 जून, 2017 को सेवानिवृत्त हो चुका है और सेवानिवृत्ति के तुरंत बाद पुलिस ने सत्तारूढ़ पार्टी के प्रभाव में दो महीने के भीतर कई मामले दर्ज किए।

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