मेलबर्न, चार जून आस्ट्रेलिया और भारत ने बृहस्पतिवार को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था के सहयोग संबंधित घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए जो कि द्विपक्षीय सुरक्षा और रक्षा संबंधों में एक महत्वपूर्ण कदम है।
यह घोषणापत्र भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके आस्ट्रेलियाई समकक्ष स्कॉट मॉरिसन के बीच ऑनलाइन शिखर सम्मेलन के बाद आया है।
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आस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री मारिसे पेने ने एक आधिकारिक बयान में कहा, '' हिंद-प्रशात में समुद्री सहयोग पर संयुक्त घोषणापत्र हमारे राष्ट्रों को क्षेत्र में नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था का समर्थन करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है जो कि सभी राष्ट्रों की संप्रभुता के सम्मान और समुद्र संबंधी अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक है।''
इससे पहले, आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने बृहस्पतिवार को भारत के साथ व्यापक रणनीतिक साझेदारी को ‘‘नये स्तर’’ का द्विपक्षीय सहयोग बताया जो कि द्विपक्षीय विश्वास पर आधारित है। उन्होंने साथ ही मुश्किल समय में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में ‘‘स्थिरता’’ लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा की।
दोनों नेताओं ने अपने पहले ऑनलाइन शिखर सम्मेलन में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की जिसमें व्यापार, रक्षा, शिक्षा के साथ ही कोविड-19 संकट शामिल है।
शिखर सम्मेलन ऐसे समय आयोजित हुआ जब आस्ट्रेलिया में भीषण आग के चलते मॉरिसन को जनवरी 2020 में अपनी भारत यात्रा रद्द करनी पड़ी थी।
आनलाइन शिखर सम्मेलन की शुरूआत में मॉरिसन ने मोदी को उनके नेतृत्व के लिए धन्यवाद दिया और जी-20 एवं हिंद-प्रशांत में उनकी भूमिका के लिए भी उनकी प्रशंसा की। मॉरिसन ने मोदी को एक ऐसा नेता बताया जिन्होंने मुश्किल समय में सकारात्मक कदम उठाये और स्थिरता लाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभायी।
मॉरिसन ने कहा कि दोनों देश आने वाले वर्षों में काफी कुछ हासिल कर सकते हैं जैसा दोनों ने पूर्व में किया है।
उन्होंने कहा, ‘‘हम एक समावेशी और समृद्ध हिंद-प्रशांत.. के लिए प्रतिबद्ध हैं और आने वाले वर्षों में उस क्षेत्र में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।’’
उन्होंने घोषणा की कि दोनों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सहयोग पर एक साझा दृष्टिकोण को लेकर एक संयुक्त घोषणापत्र जारी करेंगे। यह ऐसे समय होगा जब चीन क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा है।
चीन का दक्षिण एवं पूर्वी चीन सागर में क्षेत्रीय विवाद है। पिछले कुछ वर्षों में चीन ने मानव निर्मित द्वीपों का सैन्यकरण करने में काफी प्रगति हासिल की है।
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