नयी दिल्ली, 28 सितंबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को पुलिस को निर्देश दिया कि 1984 के सिख विरोधी दंगों के मामले में गवाह और विवादास्पद शस्त्र विक्रेता अभिषेक वर्मा को हर समय तीन सुरक्षा कर्मी मुहैया कराये जाएं क्योंकि उन्हें धमकियां मिल रही हैं।
न्यायमूर्ति योगेश खन्ना ने कहा कि वर्मा और उनके परिवार के सदस्यों के लिए तीन सुरक्षा कर्मी मुहैया कराने के लिए 27 सितंबर, 2017 को पुलिस उपायुक्त (दक्षिण) को दिये गये उच्च न्यायालय के आदेश को अगले निर्देश तक जारी रखा जाए।
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उच्च न्यायालय ने सीबीआई और दिल्ली पुलिस से वर्मा की याचिका पर जवाब दाखिल करने को कहा जिन्होंने उन्हें तीन हथियारबंद पीएसओ का सुरक्षा घेरा हर समय उपलब्ध कराते रहने के लिए अधिकारियों को निर्देश देने का अनुरोध किया है। दंगों के मामले में निचली अदालत में वर्मा से पूछताछ पूरी होने तक उन्हें और उनके परिजनों को दक्षिण जिला पुलिस लाइन्स, हौज खास से पुलिस सुरक्षा मुहैया कराई गयी है।
अदालत ने चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा और अगली सुनवाई के लिए 26 नवंबर की तारीख तय की।
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अदालत ने कहा कि वर्मा के वकील की इस दलील को हल्के में नहीं लिया जा सकता कि सुनवाई के वक्त उनकी जरूरत पड़ सकती है और सीबीआई ने भी यह दावा किया है कि वह महत्वपूर्ण गवाह हैं।
सिख विरोधी दंगों के मामले में सीबीआई की ओर से तीन बार क्लीन चिट प्राप्त करने वाले कांग्रेस नेता जगदीश टाइटलर ने पॉलीग्राफ परीक्षण कराने से इनकार कर दिया है, वहीं वर्मा ने इस शर्त पर परीक्षण कराने की सहमति दी है कि उनकी जान को खतरा देखते हुए 24 घंटे सुरक्षा प्रदान की जाए।
वर्मा की ओर से वकील मनिंदर सिंह और दिनहर तकियार ने उच्च न्यायालय को बताया कि उनके मुवक्किल को प्रदान किया गया सुरक्षा घेरा दिल्ली पुलिस ने बिना किसी पूर्व नोटिस या सूचना के अचानक वापस ले लिया है और उन्हें तथा उनके परिजनों को खतरे का आकलन भी नहीं किया गया है।
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