नयी दिल्ली, दो सितंबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि अंकित गुर्जर की चोटों की प्रकृति स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं कि यह हिरासत में हुई हिंसा का मामला था। अंकित गुर्जर की तिहाड़ जेल में मौत हो गयी थी।
न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता ने गुर्जर के परिवार के सदस्यों द्वारा दायर याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया जिसमें गुर्जर की कथित हत्या की जांच सीबीआई को स्थानांतरित करने का अनुरोध किया गया है। इसके साथ ही अदालत ने कहा कि इस घटना में जेल अधिकारियों द्वारा जबरन वसूली का एक बड़ा मुद्दा शामिल है।
अदालत ने कहा, “मुद्दा यह है कि जिस वक्त (पीड़ित से) फोन बरामद किया जाता है, आपका (जेल) अधिकारी पैसे मांगता है... परिवार से पैसे की उगाही की जाती है। यह काफी गंभीर मामला है। जो पीड़ित के साथ हुआ, वह दूसरों के साथ भी हुआ होगा।’’
न्यायाधीश ने कहा कि चोट की प्रकृति स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि यह हिरासत में हिंसा का मामला है।
गुर्जर (29) चार अगस्त को तिहाड़ जेल में अपनी कोठरी में मृत मिला था।
गुर्जर के परिवार ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि पीड़ित को जेल अधिकारियों द्वारा परेशान किया जा रहा था क्योंकि वह पैसे की उनकी नियमित रूप से बढ़ती मांगों को पूरा नहीं कर पा रहा था और उसकी सुनियोजित साजिश के तहत हत्या कर दी गयी।
अदालत ने 18 अगस्त को याचिका पर दिल्ली पुलिस और जेल अधिकारियों को स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था।
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