देश की खबरें | आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य के पुलिस प्रमुख की खिंचाई की
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

अमरावती, 14 सितंबर आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने सोमवार को राज्य के पुलिस महानिदेशक दामोदर गौतम सवांग की खिंचाई करते हुए टिप्पणी की कि अगर वे पुलिस बल को नियंत्रित नहीं कर सकते हैं तो उन्हें इस्तीफा दे दिया जाना चाहिए।

अदालत ने पुलिस द्वारा कथित रूप से एक व्यक्ति को अवैध तरीके से हिरासत में रखे जाने के संदर्भ में यह टिप्पणी की।

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न्यायमूर्ति राकेश कुमार और न्यायमूर्ति जे. उमा देवी की खंडपीठ ने यह भी कहा कि अगर ऐसे हालात जारी रहे तो राज्य सरकार को समस्याएं आएंगी।

खंडपीठ पूर्वी गोदावरी जिले के सुनकारा नारायण स्वामी द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में उन्होंने पुलिस द्वारा ‘‘गैर कानूनी तरीके से हिरासत में लिए गए’’ अपने रिश्तेदार पोट्टीपोथु वेंकटराजू को रिहा करने का अनुरोध किया था।

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हालांकि, पीठ ने जब यह टिप्पणी की, उस वक्त पुलिस प्रमुख उपस्थित नहीं थे।

स्वामी ने आरोप लगाया है कि पूर्वी गोदावरी जिले की अमलापुरम थाना पुलिस ने गैरकानूनी तरीके से वेंकटराजू को छह सितंबर को हिरासत में लिया। पुलिस ने विशाखापत्तनम के अधिकार क्षेत्र में आने वाले दीवानी मामले में उसे हिरासत में लिया है।

स्वामी ने यह याचिका नौ सितंबर को अदालत में दायर की थी जो सुनवाई के लिए सोमवार, 13 सितंबर को खंडपीठ के समक्ष आयी।

न्यायाधीशों ने पुलिस प्रमुख सवांग की खिंचाई करते हुए कहा कि आंध्र प्रदेश में ‘‘विधि का शासन’’ लागू नहीं किया जा रहा है।

पीठ ने कहा, ‘‘हमने अतीत में कई बार पुलिस प्रमुख को अदालत में पेशी के लिए सम्मन भेजा है, लेकिन उसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है। अगर हालात ऐसे ही रहे तो, इससे सरकार के सामने मुश्किलें खड़ी होंगी।’’

न्यायाधीशों ने यह भी याद किया कि इससे पहले भी कम से कम तीन मुकदमों में उच्च न्यायालय ने न्यायिक जांच का आदेश दिया था और सभी मामलों में पुलिस की गलती सामने आयी है।

खंडपीठ ने कहा, ‘‘ऐसा लगता है कि राज्य में पुलिस प्रणाली रास्ते से भटक रही है। अगर वह (पुलिस प्रमुख) पुलिस बल को नियंत्रित नहीं कर सकते हैं, तो उन्हें इस्तीफो दे देना चाहिए।’’

अदालत ने कहा कि हर मुकदमे की जांच सीबीआई से कराना संभव नहीं है।

रिट याचिका पर सुनवाई मंगलवार को भी जारी रहेगी।

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