नयी दिल्ली, 21 अप्रैल साकेत अदालत परिसर में शुक्रवार सुबह हुई गोलीबारी की घटना ने राष्ट्रीय राजधानी की जिला अदालतों में दिल्ली पुलिस के सुरक्षा प्रबंधों पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस ने कहा कि उसने सुरक्षा कड़ी कर दी है, वहीं कुछ वकीलों ने प्रवेश द्वारों पर कड़ी निगरानी रखने, अदालत परिसर में प्रवेश करने वालों की तलाशी लेने तथा उनके वाहनों की अच्छी तरह से जांच करने का आह्वान किया।
अदालत परिसर में तैनात सुरक्षाकर्मियों ने दावा किया कि कई वकील अपनी तलाशी नहीं लेने देते, लेकिन कुछ वकीलों ने जोर देकर कहा कि वे खुद की जांच कराते हैं और सुरक्षा नियमों का पालन करते हैं।
पुलिस ने कहा कि उसने अदालत परिसर के अंदर अवरोधकों की संख्या बढ़ा दी है और अतिरिक्त अर्धसैनिक बलों को तैनात किया है।
अदालत में वकालत करने वाले अधिवक्ताओं के अनुसार आमतौर पर गेट नंबर चार से परिसर में प्रवेश किया जाता है। गेट नंबर पांच हमेशा बंद रहता है। गेट नंबर 6 से कोई भी बाहर निकल सकता है लेकिन केवल न्यायाधीश ही इससे प्रवेश कर सकते हैं। न्यायाधीश गेट नंबर-1 से प्रवेश कर सकते हैं, लेकिन पैदल यात्रियों को इससे प्रवेश की अनुमति नहीं है।
उन्होंने कहा कि गेट नंबर-2 से सिर्फ वकील, पुलिस और अदालत के कर्मचारी ही प्रवेश कर सकते हैं। गेट नंबर-3 और 4 सभी के लिए खुले रहते हैं लेकिन किसी भी वाहन को इनसे प्रवेश करने की अनुमति नहीं है।
अधिवक्ताओं ने कहा कि गेट नंबर 3 और 4 पर मेटल डिटेक्टर लगाए गए हैं और अदालत परिसर के अंदर पर्याप्त संख्या में सीसीटीवी कैमरे हैं।
शुक्रवार को गेट नंबर-3 पर सुरक्षाकर्मियों ने दावा किया कि उन्होंने अपने पास से गुजरने वाले सभी लोगों की तलाशी ली और उनके सामान की जांच की।
इसके बावजूद, वकील के वेश में एक व्यक्ति पिस्तौल लेकर अदालत परिसर में घुस गया और उसने 25 लाख रुपये के विवाद में एक महिला पर कई गोलियां चलाईं।
हमलावर से बचने की कोशिश में वकीलों के ब्लॉक की ओर भागी महिला को पेट और हाथ में गोली लगी है। हमला करने वाला व्यक्ति अधिवक्ता है, जिसे साकेत अदालत बार एसोसिएशन ने निलंबित कर दिया था। घटना के वीडियो व्यापक रूप से ऑनलाइन दिखाई दिए और कई उपयोगकर्ताओं ने अदालत परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए।
घटना के प्रत्यक्षदर्शी एक वकील ने कहा कि हमलावर द्वारा दायर धोखाधड़ी के मामले की सुनवाई खत्म होने के बाद महिला वकीलों के ब्लॉक में आई थी।
उन्होंने कहा, "जब हमलावर ने महिला से दुर्व्यवहार किया, तो मैंने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि वह महिला है, लिहाजा उसे गाली न दे। लेकिन वह नहीं माना। फिर पता नहीं क्या हुआ। उसने पिस्तौल निकाली और महिला पर गोली चलानी शुरू कर दी।"
घटना के बाद पुलिस की अपराध शाखा और विशेष प्रकोष्ठ की टीम घटनास्थल पर पहुंचीं।
पुलिस उपायुक्त चंदन चौधरी भी सुरक्षा की समीक्षा करने के लिए दूसरी बार अदालत परिसर पहुंचे और सुरक्षा बढ़ाने की आवश्यकता के बारे में वकील संघ के सदस्यों के साथ चर्चा की।
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