देश की खबरें | मादक पदार्थ की लत ‘महामारी जैसी’; गिरफ्तारी के दौरान नियमों का सख्त अनुपालन जरूरी: अदालत

मुंबई, पांच मार्च बंबई उच्च न्यायालय ने एक मामले की सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि मादक पदार्थों की तस्करी एक गंभीर अपराध है और नशीली दवाओं की लत ‘महामारी जैसी’ है।

अदालत ने साथ ही जोर दिया कि अधिकारियों को किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करते समय और बरामदगी प्रक्रिया के दौरान अनिवार्य नियमों का ईमानदारी से पालन करना चाहिए।

न्यायमूर्ति मिलिंद जाधव की एकल पीठ ने मंगलवार को पारित आदेश में कहा कि समाज में मादक पदार्थों का कारोबार करने वाले लोगों से सख्ती से निपटा जाना चाहिए, लेकिन यह किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता की कीमत पर नहीं हो सकता।

अदालत ने यह टिप्पणी स्वापक औषधि और मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम(एनडीपीएस) के प्रावधानों के तहत कथित तौर पर मादक पदार्थ रखने के आरोप में 2023 में गिरफ्तार चार लोगों को जमानत देते हुए की।

आरोपियों ने जमानत का अनुरोध करते हुए उनकी गिरफ्तारी के समय तथा उनके आवासीय परिसरों की तलाशी के दौरान प्राधिकारियों द्वारा की गई प्रक्रियागत अनियमितताओं का मुद्दा उठाया।

पीठ ने अपने आदेश में कहा कि अभियोजन एजेंसी को बरामदगी प्रक्रिया के दौरान कानून में निर्धारित प्रक्रिया का कड़ाई से पालन करना होगा।

अदालत ने कहा, ‘‘ऐसा इसलिए है क्योंकि अभियुक्त की स्वतंत्रता अत्यंत मूल्यवान अधिकार है जिसे कमजोर/मनमाने प्रक्रिया के आधार पर नहीं छीना जा सकता।’’

पीठ ने कहा कि इस मामले ने उसे मादक पदार्थों के दुरुपयोग के दुष्परिणामों के बारे में ‘गंभीरता से’ सोचने पर मजबूर कर दिया है, जो तस्करों, विक्रेताओं और मानव तस्करी का परिणाम है।

न्यायाधीश ने कहा, ‘‘मादक पदार्थों की तस्करी एक गंभीर अपराध है और मादक पदार्थों के तस्करों का खतरा सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में व्याप्त है। यह कहना गलत नहीं होगा कि मादक पदार्थों की लत एक प्रकार की महामारी है।’’

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