नयी दिल्ली, 27 जुलाई राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने रिणग्रस्त दिघी बंदरगाह के लिए अडाणी समूह के कंपनी के करार को सही पाया है। यह करार कंपनी, अडाणी पोट्र्स एण्ड स्पेशल इकोनोमिक जोन ने किया है।
एनसीएलएटी की तीन सदस्यीय पीठ ने बंदरगाह के प्रवर्तक विशाल विजय कालांत्री द्वारा दायर याचिका खारिज कर दी जिसमें राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) की मुंबई पीठ के आदेश को चुनौती दी गई थी। एनसीएलटी की उसी पीठ ने दिधी बंदरगाह के लिए अडाणी पोर्ट्स एण्ड स्पेशल इकोनोमिक जोन (एपीएसईजैड) के 650 करोड़ रुपये की समाधान योजना को 5 मार्च को मंजूरी दी थी।
अपीलीय न्यायाधिकरण ने कालांत्री के याचिका में दिये गये इस तर्क को खारिज कर दिया कि एनसीएलटी उनके द्वारा एपीएसईजे की समाधान योजना को लेकर उठाई गई आपत्तियों पर विचार करने में असफल रहा है। न्यायाधिकरण ने इसके साथ ही कालांत्री की कंपनी बालाजी इंफ्रा प्रोजैक्ट्स लिमिटेड (बीआईपीएल) द्वारा सौंपे गये निपटान प्रस्ताव को भी नामंजूर कर दिया।
एनसीएलएटी पीठ के प्रमुख कार्यवाहक चेयरपर्सन न्यायमूर्ति बी एल भट ने कहा, ‘‘इस याचिका में कुछ खास नहीं है इसलिये इसे खारिज किया जाता है।’’
एनसीएलएटी ने यह भी कहा कि एपीएसईजैड की समाधान योजना को मंजूरी देते हुये जरूरी प्रक्रिया का पालन किया गया है।
एपीएसईजैड की सौंपी गई समाधान योजना को रिणदाताओं की समिति ने 99.68 प्रतिशत के भारी बहुमत के साथ मंजूरी दी थी।
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