तिरुवनंतपुरम, 19 सितंबर केरल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष वी. डी. सतीशन ने मंगलवार को उन पुजारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की, जिन्होंने हाल ही में कन्नूर जिले के एक मंदिर में आयोजित समारोह के दौरान जाति के आधार पर देवस्वोम मंत्री के. राधाकृष्णन के साथ कथित तौर पर भेदभाव किया था।
कांग्रेस के नेता सतीशन ने कहा कि अगर कोई वाइकोम सत्याग्रह के 100 साल बाद अस्पृश्यता को वापस लाने की कोशिश कर रहा है, तो इसे बहुत गंभीरता से लेना होगा और सरकार को संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी होगी।
सतीशन ने घटना को 'स्तबधकारी और दुर्भाग्यपूर्ण' करार देते हुए पूछा कि मंत्री ने इस बात को इतने लंबे समय तक क्यों छिपाया।
सतीशन ने कहा, “उन्होंने (मंत्री ने) एक सार्वजनिक सभा में इसका खुलासा किया। मेरा सुझाव है कि सरकार को संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए क्योंकि 100 साल पहले हमने पिछड़े समुदायों, दलित समुदायों के लिए वाइकोम सत्याग्रह किया था। 1936 में केरल के पिछड़े और दलित समुदाय के लोगों को मंदिरों में प्रवेश की अनुमति दी गई थी।”
अनुसूचित जाति समुदाय से संबंध रखने वाले राधाकृष्णन ने कहा कि मंदिर के दो पुजारियों ने उन्हें वह ‘दीपक’ सौंपने से इनकार कर दिया, जो वे उद्घाटन के अवसर पर कार्यक्रम स्थल पर मुख्य दीप प्रज्जवलित करने के लिए लाए थे।
मंत्री ने आरोप लगाया कि इसके बजाय उन्होंने खुद मुख्य दीप प्रज्जवलित किया और उसके बाद, उन्होंने ‘दीपक’ को जमीन पर रख दिया, यह सोचकर कि वह इसे उठा लेंगे और मुख्य दीप प्रज्जवलित कर देंगे।
हालांकि मंत्री ने अभी तक मंदिर के नाम का खुलासा नहीं किया है। टीवी चैनलों ने कन्नूर जिले के पायन्नूर मंदिर में हाल ही में हुए 'नादपंडाल' के उद्घाटन की तस्वीरें जारी की हैं। इस कार्यक्रम में मंत्री ने शिरकत की थी।
वीडियो में देखा जा सकता है कि पुजारी 'दीपक' मंत्री को नहीं सौंप रहे और उसे जमीन पर रख रहे हैं।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)












QuickLY