जयपुर, 19 अप्रैल राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) के सदस्य बाबूलाल कटारा ने द्वितीय श्रेणी अध्यापक भर्ती परीक्षा-2022 का पेपर लीक करने के लिए कथित तौर पर 60 लाख रुपये लिए थे। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी।
उल्लेखनीय है कि पुलिस के विशेष समूह (एसओजी) ने इस पेपर लीक मामले में कटारा के साथ उसके भतीजे विजय कटारा और आरपीएससी के एक चालक गोपाल सिंह को मंगलवार को हिरासत में लिया था। इन तीनों को कल रात गिरफ्तार कर उदयपुर की एक अदालत में पेश किया गया जहां से उन्हें 29 अप्रैल तक पुलिस हिरासत में भेज दिया।
एसओजी के अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजी) अशोक राठौड़ ने यहां संवाददाताओं को बताया कि जांच के दौरान यह बात सामने आई कि पेपर सेट कराने की जिम्मेदारी बाबूलाल कटारा की थी, उसकी पेपर तक पहुंच थी। इसे प्रिंटिंग प्रेस में भेजने से पहले, उसने शेर सिंह मीणा को पेपर की एक प्रति साझा की।
राठौड़ ने कहा कि कटारा को कागज देने के एवज में 60 लाख रुपये मिले। कटारा के संपर्क में रहने वाले शिक्षक शेर सिंह मीणा ने अन्य आरोपियों को पेपर बेच दिया और अभ्यर्थियों से पांच लाख रुपये या उससे अधिक की राशि ली गयी। मीणा को राजस्थान पुलिस ने ओडिशा में पकड़ा था।
राठौड़ ने कहा कि बाबूलाल कटारा से पूछताछ में यह स्पष्ट हो जाएगा कि आरपीएससी का कोई अन्य व्यक्ति इसमें शामिल है या नहीं।
पिछले साल दिसंबर में द्वितीय श्रेणी अध्यापक भर्ती परीक्षा के पेपर लीक मामले में 37 अभ्यर्थियों समेत कुल 55 लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
उदयपुर पुलिस ने एक बस को रोका था जिसमें परीक्षार्थी परीक्षा देने जा रहे थे। परीक्षार्थियों के पास से प्रश्नपत्र मिला, जिसके बाद सभी को गिरफ्तार कर लिया गया। बाद में कुछ अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
उन्होंने कहा कि यह शुरू से ही स्पष्ट था कि पेपर किसी परीक्षा केंद्र से लीक नहीं हुआ था और आरपीएससी की भूमिका संदिग्ध थी।
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