गुरूग्राम (हरियाणा), नौ मार्च साइबर कैफे मालिक को एक झूठे मामले में फंसाकर उसे अवैध रूप से बंधक बनाने के मामले में एक स्थानीय अदालत ने बुधवार को चार सेवानिवृत एवं सेवारत पुलिसकर्मियों को अलग अलग अवधि वाली कैद की सजा सुनायी।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अश्विनी कुमार मेहता ने अपराध शाखा के तत्कालीन उपनिरीक्षक को पांच साल की कैद की सजा सुनायी एवं उसपर 40000 रूपये का जुर्माना लगाया।
कांस्टेबल राजेश, सुनील एवं विनोद को तीन -तीन साल की कैद की सजा सुनायी गयी और उनपर भी 40000-40000 रूपये का जुर्माना लगाया।
अदालत ने चारों कर्मियों को 23 फरवरी को दोषी ठहराया था जो तब अपराध शाखा में कार्यरत थे।
वरिष्ठ वकील अमित जैन के अनुसार इन चारों ने तीन सितंबर, 2009 को यहां राजीव नगर में एक साइबर कैफे पर छापा मारा था । उन्होंने कैफे मालिक हंसराज राठी पर फर्जी मतदाता पहचान पत्र बनाने का आरोप लगाया था।
राठी और उसके दो कर्मियों को पुलिस ने उठा लिया और छोड़ने के लिए एक लाख रूपये की रिश्वत मांगी। जब वे रिश्वत नहीं दे पाये तब उन्हें झूठे मामले में फंसा दिया गया और उन्हें जेल हुई। जमानत पर रिहा होने के बाद राठी ने अधिकारियों से संबंधित पुलिसकर्मियों के विरूद्ध शिकायत की ।
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