देश की खबरें | अनुच्छेद 370 के हटने के बाद जम्मू कश्मीर मे 35, 000 रिक्तियां भरी जा रही हैं : अधिकारी
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

श्रीनगर, चार अगस्त जम्मू कश्मीर में डॉक्टरों, पशुचिकित्सकों और पंचायत सहायकों के कुल 10,000 पदों पर भर्ती की जा रही है जबकि आगामी महीनों में विभिन्न विभागों में 25,000 लोगों की भर्ती करने की योजना है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

अनुच्छेद 370 के प्रावधानों के निरसन और जम्मू कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के क्रियान्वयन के बाद से पश्चिम पाकिस्तान के कुल 20,000 शरणार्थियों को केंद्रशासित प्रदेश जम्मू कश्मीर में नागरिकता प्रदान की गयी और प्रति परिवार साढे पांच लाख रूपये की वित्तीय सहायता पहुंचायी गयी।

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अधिकारियों के मुताबिक करीब 10,000 सफाई कर्मचारियों को शिक्षा और नौकरियों जैसे सभी अधिकारों एवं विशेषाधिकारों के साथ वैध बाशिंदे होने के प्रमाणपत्र मिले।

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि जम्मू कश्मीर सरकार ने बड़ा और त्वरित भर्ती अभियान शुरू किया है तथा पहले चरण में 10,000 रिक्तियां भरी जा रही हैं जबकि 25,000 और भर्तियों की योजना है।

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पिछले साल पांच अगस्त को अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी करने और राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों-- जम्मू कश्मीर और लद्दाख में बांटने के बाद इस केंद्र शासित प्रदेश ने यह पहल की है।

अधिकारी के अनुसार जो रिक्तियां भरी जा रही हैं वे डॉक्टरों, पशुचिकित्सकों, पंचायत लेखा सहायकों और चतुर्थवर्गीय पदों के लिए हैं। उनमें ज्यादातर पदों के लिए साक्षात्कार समाप्त कर दिया गया है और अब उन्हें बस लिखित परीक्षा के परिणाम के आधार पर भरा जाएगा।

प्रगतिशील और ठोस कदम के तौर पर विधवाओं, बिना किसी सरकारी नौकरी वाले परिवारों के उम्मीदवारों तथा आकस्मिक कर्मियों को उम्र में पांच साल की छूट के लिए विशेष चतुर्थ वर्गीय भर्ती नियमावली अधिसूचित की गयी है।

अधिकारियों के मुताबिक विद्युत परियोजनाओं, प्रधानमंत्री के विकास कार्यक्रम के तहत बुनियादी ढांचों और केंद्र के अन्य बुनियादी ढांचा कार्यक्रमों के माध्यम से रोजगार के हजारों अन्य अवसर सृजित किये जा रहे हैं।

अधिकारियों के अनुसार जम्मू कश्मीर ने 26 अक्टूबर, 1947 को भारत में विलय के साथ भारत के राज्य के रूप में अपना सफर शुरू किया था। 26 जनवरी 1950 को प्रभाव में आये भारतीय संविधान ने अस्थायी अनुच्छेद 370 के रूप में जम्मू कश्मीर के लिए विशेष प्रावधानों की व्यवस्था की और 1954 में राष्ट्रपति आदेश से जोड़े गये अनुच्छेद 35 ए ने उसमें सहयोग किया।

अधिकारियों के अनुसार अनुच्छेद 370 में जम्मू कश्मीर का शेष भारत के साथ संबंध का विस्तृत ब्योरा था जबकि अनुच्छेद 35 ए ने जम्मू कश्मीर के स्थायी बाशिंदों को विशेष अधिकार प्रदान किये । साथ ही उसने वाल्मिकियों, गोरखाओं और दलितों जैसे वंचित एवं हाशिये पर धकेले समुदायों को उनसे वंचित रखा और उनके साथ भेदभाव किया।

एक अधिकारी के अनुसार संक्षेप में दोनों अनुच्छेदों ने जम्मू कश्मीर में ‘संवैधानिक मान्यता प्राप्त रंगभेद’ प्रणाली को जन्म दिया जहां चंद आभिजात्यों को विशेष राजनीतिक, प्रशासनिक और कानूनी अधिकार दिये जबकि महिलाओं एवं समाज के कमजोर तबके के साथ भेदभाव किया। उनके अनुसार जम्मू कश्मीर के समग्र विकास के लिए दोनों अनुच्छेदों को हटाया जाना अपरिहार्य हो गया था।

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