देश की खबरें | केंद्र को 1600 छात्रों ने पत्र लिखकर ईआईए मसौदा वापस लेने का आग्रह किया
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, चार अगस्त देशभर के 1,600 से अधिक छात्रों ने केंद्र से पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन (ईआईए) अधिसूचना के मसौदे को वापस लेने का आग्रह किया है। इन छात्रों ने चिंता व्यक्त की है कि इस तरह के संशोधन से पृथ्वी भविष्य की पीढ़ियों के लिए ‘‘रहने योग्य नहीं रहेगी।’’

छात्रों ने पर्यावरण मंत्रालय को भेजे गए 22-पृष्ठों वाले पत्र में सुझाव दिया कि भारत को एक पर्यावरण नीति लागू करनी चाहिए जो ‘रियो घोषणापत्र’ के सिद्धांत 10 का पालन करती हो। इस घोषणापत्र में पर्यावरणीय गुणवत्ता एवं समस्याओं को लेकर जानकारी तक स्वतंत्र रूप से पहुंच का अधिकार, निर्णय लेने की प्रक्रिया में सार्थक रूप से शामिल होने का अधिकार और पर्यावरण कानूनों को लागू करने या नुकसान के लिए मुआवजे की मांग के अधिकार की बात की गई है।

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ये छात्र नेशनल लॉ स्कूल, एमिटी विश्वविद्यालय और जिंदल ग्लोबल लॉ स्कूल (जेजीएलएस) सहित विभिन्न लॉ कालेज से हैं।

जिंदल ग्लोबल लॉ स्कूल की लीगल एड द्वारा तैयार किए गए पत्र में कहा गया है, ‘‘हमारे पास निश्चित रूप से अन्य अधिकार क्षेत्रों से सीखने के लिए बहुत कुछ है। ईयू (यूरोपीय संघ) के देशों और अमेरिका के साथ भारत में ईआईए नियमों के तुलनात्मक विश्लेषण पर यह देखा जा सकता है कि भारत में प्रक्रिया शुरूआती चरणों में सार्वजनिक और सरकारी एजेंसियों की भागीदारी को जानबूझकर सीमित करती है। इसमें किसी परियोजना के परिदृश्य और दृश्य प्रभावों को लेकर कोई प्रावधान नहीं है।’’

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पत्र पर देशभर के 60 से अधिक छात्र संघों ने हस्ताक्षर किए गए हैं।

जेजीएलएस के छात्रों में से एक ने कहा कि हालांकि, कोई जवाब नहीं मिलने के बाद, उन्होंने 28 जून को प्रधानमंत्री कार्यालय को एक और पत्र भेजा, जिसमें 80 से अधिक छात्रसंघों के हस्ताक्षर थे।

छात्र ने कहा, ‘‘उन्होंने माईजीओवी पोर्टल पर भी कई शिकायतें दर्ज कीं, लेकिन इन सभी को अस्वीकार कर दिया गया।’’

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