देश की खबरें | महाराष्ट्र में अब भी फंसे हैं पश्चिम बंगाल के प्रवासी : अदालत में याचिका
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मुंबई, नौ जून महाराष्ट्र सरकार ने मंगलवार को दोहराया कि उसके यहां अब श्रमिक विशेष ट्रेनों की कोई मांग लंबित नहीं है लेकिन एक मजदूर संघ ने बंबई उच्च न्यायालय को बताया कि कुछ प्रवासियों को अब भी अपने घर लौटने का इंतजार है, खास कर पश्चिम बंगाल के प्रवासियों को।

महाधिवक्ता आशुतोष कुंभाकोनी ने मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता की खंडपीठ को बताया कि शुक्रवार (पांच जून) से महाराष्ट्र से सिर्फ तीन श्रमिक विशेष ट्रेनें रवाना हुई हैं।

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पीठ सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस की एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें कोविड-19 महामारी के बीच फंसे प्रवासी कामगारों की दुर्दशा के बारे में चिंता व्यक्त की गई है।

याचिकाकर्ता के मुताबिक जिन प्रवासी कामगारों ने श्रमिक विशेष ट्रेनों या बसों से महाराष्ट्र से जाने के लिये आवेदन जमा किये थे उन्हें उनके आवेदन की स्थिति के बारे में अंधेरे में रखा गया।

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याचिका में यह भी कहा गया कि जब तक वे अपने गृह स्थान जाने के लिये ट्रेनों या बसों में बैठते हैं उसके पहले तक उन्हें ठसाठस भरे और बिना साफ-सफाई वाले आश्रयगृहों में भोजन और अन्य आवश्यक वस्तुओं के बगैर रखा जाता है।

याचिकाकर्ता अधिवक्ता गायत्री सिंह और रोनिता भट्टाचार्य बेक्टर ने मंगलवार को अदालत को बताया कि सरकार का विशेष ट्रेन की मांग नहीं होने का दावा गलत है क्योंकि अब भी कई कामगार,खासतौर पर पश्चिम बंगाल के राज्य छोड़कर जाने का इंतजार कर रहे हैं।

याचिकाकर्ता ने कहा कि श्रमिक विशेष ट्रेनों के लिये आवेदन प्रक्रिया बेहद जटिल है जिसे सरल बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने उन प्रवासी कामगारों की सूची भी अदालत को दिखाई जो पूर्व में महाराष्ट्र से रवाना हुई ट्रेनों में सवार होने में नाकाम रहे।

अदालत ने इस मामले में अगली सुनवाई के लिये 12 जून की तारीख तय कर सरकार से याचिकाकर्ता के सुझावों पर विचार करने और अदालत को श्रमिक विशेष ट्रेनों की मांग से अवगत कराने को कहा।

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