VIDEO: कौन हैं शीला कार्की? जो बन सकती हैं Nepal की अंतरिम प्रधानमंत्री, भारत और पीएम मोदी से हैं अच्छे संबंध
(Photo Credits Twitter)

Who is Sheela Karki: नेपाल में लगातार बढ़ते विरोध प्रदर्शनों (Nepal Protest) और भ्रष्टाचार के खिलाफ सड़कों पर उतर रही भीड़ के बीच अब एक बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकता है. खबर है कि देश की पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की (Former Chief Justice Sushila Karki) आज अंतरिम प्रधानमंत्री पद की शपथ ले सकती हैं. काठमांडू (Kathmandu) स्थित राष्ट्रपति भवन 'शीतल निवास' से आई ताजा तस्वीरों ने स्थिति की गंभीरता को और भी स्पष्ट कर दिया है. प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति भवन पर हमला कर तोड़फोड़ की और आगजनी भी की.

ये भी पढें: नेपाल की राह आसान नहीं: अंतरिम सरकार का गठन और संविधान, देश के लिए सभी पक्षों का मिलेगा ‘मन’?

राष्ट्रपति भवन के बाहर का लेटेस्ट दृश्य

पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह ने शांति की अपील की

पूर्व नेपाल नरेश ने शांति की अपील की

इस बीच, नेपाल के पूर्व नरेश ज्ञानेंद्र शाह (Former King Gyanendra Shah) ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है. उन्होंने कहा कि हाल की हिंसा और आगजनी से जान-माल का भारी नुकसान हुआ है. वे इससे बेहद दुखी हैं. शाह ने कहा कि कोई भी व्यवस्था या विचारधारा नागरिकों की स्वतंत्रता से बड़ी नहीं हो सकती.

पूर्व CJN ने PM मोदी की तारीफ की

पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की ने भी मौजूदा हालात पर अपनी राय रखी. भारत-नेपाल संबंधों (India-Nepal Relations) का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच गहरी घनिष्ठता है और नेपाल को हमेशा भारत से सहयोग मिलता रहा है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) की भी तारीफ की और कहा कि भारतीय नेताओं के साथ उनके अच्छे संबंध हैं.

कार्की ने कहा, "मैं मोदीजी का अभिवादन करती हूं. उन पर मेरी अच्छी छाप है."

कुलमन घीसिंग का नाम भी चर्चा में

इसी बीच, अंतरिम सरकार का नेतृत्व करने के लिए एक और नाम सामने आया था - कुलमन घीसिंग (Kulman Ghising), जो नेपाल विद्युत प्राधिकरण के पूर्व प्रमुख हैं. उन्हें देश में लंबे समय से चली आ रही बिजली कटौती को खत्म करने के लिए जाना जाता है. हालांकि, सूत्रों के अनुसार, सुशीला कार्की का नाम फिलहाल आगे चल रहा है.

अब तक 31 लोगों की जा चुकी है जान

सोमवार को शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है. सरकार द्वारा सोशल मीडिया (Nepal Social Media Ban) पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने के बाद, गुस्साई भीड़ राजधानी काठमांडू से लेकर पोखरा, बुटवल और बीरगंज जैसे बड़े शहरों तक फैल गई. पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए गोलीबारी भी की. खबरों के मुताबिक, अब तक 31 लोगों की जान जा चुकी है और एक हजार से ज्यादा लोग घायल हुए हैं.

सोशल मीडिया बैन करने पर हुआ था बवाल

नेपाल में यह जनांदोलन अब सोशल मीडिया पर प्रतिबंध तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भ्रष्टाचार और शासन की विफलताओं के खिलाफ युवा पीढ़ी की आवाज़ बन गया है. अगर सुशीला कार्की आज अंतरिम प्रधानमंत्री बन जाती हैं, तो यह नेपाल के राजनीतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है