बड़ी जासूसी का खुलासा: अमेरिका का 'मोस्ट वांटेड' चीनी हैकर इटली में गिरफ्तार, कोरोना वैक्सीन का डेटा चुराने का आरोप

Chinese Hacker Arrested: इटली की पुलिस ने एक चीनी नागरिक को गिरफ्तार किया है. इस पर अमेरिका ने आरोप लगाया है कि उसने 2020 में कोरोना महामारी के चरम पर चीन की सरकार के लिए हैकिंग की थी. आरोप है कि इस हैकर ने एक ग्रुप के साथ मिलकर अमेरिका से COVID-19 वैक्सीन से जुड़े खुफिया राज चुराए थे. इस चीनी नागरिक का नाम जू ज़ेवेई (Xu Zewei) है. उसे 3 जुलाई को मिलान के एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया, क्योंकि अमेरिका ने उसके खिलाफ एक अंतरराष्ट्रीय वारंट जारी किया था.

जू ज़ेवेई पर क्या आरोप हैं?

अमेरिका के अनुसार, 33 साल का ज़ेवेई चीन के खुफिया मंत्रालय (मिनिस्ट्री ऑफ स्टेट सिक्योरिटी) के कहने पर काम कर रहा था. उस पर आरोप है कि उसने अमेरिका के उन विश्वविद्यालयों, वायरोलॉजिस्ट और इम्यूनोलॉजिस्ट (रोग प्रतिरोधक क्षमता के विशेषज्ञ) को निशाना बनाया, जो COVID-19 की वैक्सीन, इलाज और टेस्टिंग पर रिसर्च कर रहे थे. इस काम में एक और व्यक्ति, झांग यू (Zhang Yu) का नाम भी शामिल है, जो माना जा रहा है कि अभी चीन में है.

ज़ेवेई को अब मिलान की एक अदालत में पेश किया गया है. अमेरिका उसे अपने देश के टेक्सास में ले जाना चाहता है, जहां उस पर धोखाधड़ी, पहचान की चोरी और हैकिंग जैसे गंभीर आरोप हैं.

अमेरिका का यह भी मानना है कि ज़ेवेई 'हेफनियम' (Hafnium) नाम के एक सरकारी हैकिंग ग्रुप से जुड़ा था. इसी ग्रुप पर 2021 में माइक्रोसॉफ्ट के ईमेल सॉफ्टवेयर में सेंध लगाकर बड़े पैमाने पर जासूसी करने का आरोप लगा था.

इटली के लिए मुश्किल घड़ी क्यों?

यह गिरफ्तारी इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी की सरकार के लिए एक अजीब स्थिति पैदा कर सकती है. ऐसा इसलिए क्योंकि इटली एक तरफ तो अमेरिका से अच्छे रिश्ते रखना चाहता है, वहीं दूसरी तरफ चीन के साथ भी उसके व्यापारिक संबंध काफी अच्छे हैं.

मेलोनी ने अमेरिका के साथ मजबूत रिश्ते बनाए हैं, लेकिन उन्होंने चीन के साथ भी दोस्ती बनाए रखी है. हाल ही में इटली, चीन के बड़े प्रोजेक्ट 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' से अलग हो गया था, फिर भी दोनों देशों के रिश्ते ठीक-ठाक हैं. दिलचस्प बात यह है कि इटली के उप प्रधानमंत्री को इसी हफ्ते चीन के दौरे पर भी जाना था.

चीन ने क्या कहा?

वॉशिंगटन में मौजूद चीनी दूतावास ने कहा कि उन्हें ज़ेवेई के मामले की जानकारी नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि "ऐसी अफवाहें पहले भी कई बार सामने आई हैं." चीन का कहना है कि वैक्सीन रिसर्च में वह दुनिया के सबसे आगे देशों में से है. दूतावास के प्रवक्ता ने कहा, "चीन को तथाकथित चोरी के जरिए वैक्सीन हासिल करने की न तो जरूरत है और न ही उसका ऐसा कोई इरादा है."

जासूसी का पुराना रिकॉर्ड

जब 2020 में महामारी फैली थी, तो दुनिया भर की खुफिया एजेंसियां वायरस से जुड़ी जानकारी इकट्ठा करने में लग गई थीं. उस समय, अमेरिका की जांच एजेंसी FBI ने कई बार चीन पर आरोप लगाया था कि वह अमेरिकी संस्थानों के सिस्टम को हैक करके कोरोना से जुड़ी महत्वपूर्ण रिसर्च चुराने की कोशिश कर रहा है. 2020 के मध्य में, अमेरिकी न्याय विभाग ने दो अन्य चीनी नागरिकों पर भी अमेरिका के व्यापारिक रहस्यों को चुराने की कोशिश का आरोप लगाया था. उस वक्त चीन के सरकारी मीडिया ने कहा था कि वॉशिंगटन के पास इन आरोपों का कोई सबूत नहीं है.