'आतंकिस्तान' को तगड़ा झटका: अमेरिका ने पाकिस्तानियों के लिए वीजा अवधि 5 साल से घटाकर 3 महीने की
अमेरिका ने आतंकिस्तान को बड़ा झटका दिया है. पाकिस्तान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए ट्रंप प्रशासन ने वहां के नागरिकों के लिए वीजा की अवधि पांच साल से घटाकर तीन महीने कर दी है.
वाशिंगटन: अमेरिका ने आतंकिस्तान को बड़ा झटका दिया है. पाकिस्तान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए ट्रंप प्रशासन ने वहां के नागरिकों के लिए वीजा की अवधि पांच साल से घटाकर तीन महीने कर दी है. मीडिया रिपोर्ट्स में अमेरिकी दूतावास के प्रवक्ता का हवाला देते हुए बताया कि नए नियम पाकिस्तानी पत्रकारों पर भी लागू होंगे. अमेरिकी सरकार ने पाकिस्तानियों के लिए वीजा आवेदन शुल्क भी बढ़ाकर 160 डॉलर से 192 डॉलर कर दिया है.
अमेरिकी सरकार के अनुसार, पाकिस्तान सरकार ने वीजा नीति और शुल्क को संशोधित करने के कदम के जवाब में यह निर्णय लिया है. इस्लामाबाद ने पहले ही वीजा की अवधि कम कर दी थी और अमेरिकी नागरिकों के लिए फीस बढ़ा दी थी.
पाकिस्तान में मौजूद अमेरिकी राजदूत ने इस बात की सूचना सरकार को दे दी है. इससे पहले पिछले साल मई में, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी राजनयिकों को दी गई खास छुट को वापस ले लिया था.
Visa duration for Pakistani citizens has been reduced to three months from five years, reports ARY News quoting US Embassy spokesperson. pic.twitter.com/5Pq2ylghhf
— ANI (@ANI) March 6, 2019
आतंकियों को पलने वाले पाकिस्तान को हर जगह से बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है. इस कड़ी भारत ने करीब 500 पाकिस्तानियों को अजमेर शरीफ के लिए वीजा देने से इनकार कर दिया है. रेडियो पाकिस्तान के अनुसार, पाकिस्तान के धार्मिक मामलों के मंत्री पीर नूर-उल-हक कादरी ने बताया कि 500 पाकिस्तानी श्रद्धालुओं को गुरुवार को पड़ोसी देश जाना था लेकिन भारत ने उन्हें वीजा देने से इनकार कर दिया.
कादरी ने बताया कि मंत्रालय ने भारतीय दूतावास से वीजा ठुकराने की सूचना मिलने के बाद एसएमएस के जरिए सभी श्रद्धालुओं को इसकी सूचना दी. उन्होंने बताया कि भारतीय दूतावास ने अभी इन श्रद्धालुओं के पासपोर्ट वापस नहीं किए हैं.
(The above story first appeared on LatestLY on Mar 06, 2019 09:47 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

