US-Iran Tensions: तेहरान के रेवोल्यूशन स्क्वायर पर लगा डोनाल्ड ट्रंप के ताबूत वाला विशाल होर्डर, लिखा- 'हम ट्रंप को मार डालेंगे' (Watch Video)

तेहरान/वाशिंगटन: मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में अमेरिका और ईरान के बीच जारी भीषण सैन्य टकराव और राजनयिक गतिरोध के बीच ईरान की राजधानी तेहरान से एक बेहद चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है. तेहरान के सबसे व्यस्त और प्रमुख चौराहे 'एंग्हेब स्क्वायर' (Enghelab Square/रेवोल्यूशन स्क्वायर) पर एक विशालकाय सरकारी बिलबोर्ड (होर्डिंग) लगाया गया है. इस होर्डिंग में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) को आंखें बंद किए एक काले कंक्रीट के ताबूत के अंदर लेटा हुआ दिखाया गया है. इस होर्डिंग पर बड़े-बड़े अक्षरों में अंग्रेजी और फारसी भाषा में लिखा है—"हम ट्रंप को मार डालेंगे" (We will kill Trump)। इस खुलेआम धमकी वाले विज्ञापन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा एजेंसियों और विश्लेषकों का ध्यान खींचा है. यह भी पढ़ें: G7 Summit 2026: ‘मैं ही बॉस हूं’; जी7 शिखर सम्मेलन में डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान, यूक्रेन को और मजबूत समर्थन देने के दिए संकेत (Watch Video)

बिलबोर्ड की बनावट और मीनाब के बच्चों का जिक्र

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान के केंद्र में स्थित इस प्रोपेगैंडा बिलबोर्ड की बनावट बेहद आक्रामक और खौफनाक है. इसमें ट्रंप को बिखरे हुए बालों, लाल टाई और पेट पर हाथ रखे ताबूत के अंदर चित्रित किया गया है. इस ताबूत के आकार को उन कंक्रीट बैरियर्स से तैयार किया गया है, जिनका इस्तेमाल ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खमेनेई के अंतिम संस्कार के दौरान किया गया था.

इस होर्डिंग पर सफेद रंग के ग्राफिटी (भित्तिचित्र) के रूप में एक और संदेश लिखा है—"मीनाब के बच्चों की याद में". गौरतलब है कि 28 फरवरी 2026 को दक्षिणी ईरान के मीनाब शहर में एक अमेरिकी हवाई हमला हुआ था, जिसकी चपेट में एक प्राइमरी स्कूल और पास का नौसैनिक बेस आ गया था. इस हमले में स्कूली छात्रों और शिक्षकों सहित कम से कम 175 लोगों की मौत हो गई थी. राष्ट्रपति ट्रंप ने जून में इस हमले के दौरान अमेरिकी सेना से 'टारगेटिंग एरर' (निशाने की चूक) होने की बात स्वीकार करते हुए कहा था कि "गलतियां हर किसी से होती हैं". ईरान इसी घटना के प्रतिशोध के रूप में इस आक्रामक प्रचार को बढ़ावा दे रहा है.

खमेनेई की मौत के बाद भड़का अमेरिका-विरोधी सेंटिमेंट

ईरान में यह तीखा अमेरिका-विरोधी रुख इसी साल फरवरी में ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खमेनेई के निधन और उसके बाद के घटनाक्रमों के बाद से चरम पर है. खमेनेई के अंतिम संस्कार के दौरान भी जुटी विशाल भीड़ ने अमेरिका से बदला लेने के नारे लगाए थे और डोनाल्ड ट्रंप को निशाना बनाने वाले प्लेकार्ड्स प्रदर्शित किए थे.

ईरान के करीब 180 सांसदों ने संसद में यह मांग भी उठाई है कि अमेरिका के साथ हुए सभी पुराने समझौतों और ज्ञापनों (MoUs) को पूरी तरह से रद्द माना जाए. पूर्व ईरानी अधिकारियों द्वारा इस क्षेत्र में मौजूद किसी अमेरिकी सैन्य बेस पर जमीनी हमला कर 100 अमेरिकियों को बंधक बनाने जैसे आक्रामक प्रस्ताव भी दिए जा रहे हैं.

ईरान ने एक विशाल बिलबोर्ड का अनावरण किया है, जिसमें डोनाल्ड ट्रंप को ताबूत में दिखाया गया है और उस पर 'हम ट्रंप को मार डालेंगे' का संदेश लिखा है 

अमेरिका की नई एयरस्ट्राइक और आर्थिक नाकेबंदी

यह बिलबोर्ड ऐसे समय में लगाया गया है जब अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियान को और तेज कर दिया है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पुष्टि की है कि 15 जुलाई 2026 (बुधवार) की रात को अमेरिकी लड़ाकू विमानों और नौसेना ने ईरान के प्रमुख बंदरगाह शहर बंदर अब्बास सहित कई उत्तरी ठिकानों पर सटीक हवाई हमले (Precision-Guided Strikes) किए हैं. इन हमलों में ईरानी कमांड सेंटरों, वायु रक्षा प्रणालियों (Air Defence), मिसाइल और ड्रोन ठिकानों को निशाना बनाया गया है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बयान जारी कर चेतावनी दी है कि यदि ईरान वार्ता की मेज पर नहीं आता है, तो अगले सप्ताह ईरान के पावर प्लांट्स और प्रमुख पुलों को भी निशाना बनाया जा सकता है. ट्रंप ने कहा:

"वे (ईरान) सौदा करना चाहते हैं, लेकिन हर बार समझौता करके उसे तोड़ देते हैं। अब उनके पास ज्यादा सैन्य ताकत नहीं बची है. अगर हम अभी पीछे हट जाएं, तो भी उन्हें अपनी इस तबाही से उबरने और दोबारा बुनियादी ढांचा खड़ा करने में 20 साल लग जाएंगे. हम उनकी नौसैनिक नाकेबंदी को जारी रखेंगे."

नाजुक मोड़ पर मध्य पूर्व के हालात

अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तेहरान के रेवोल्यूशन स्क्वायर का उपयोग हमेशा से अमेरिका और इजरायल विरोधी प्रोपेगैंडा के लिए किया जाता रहा है, लेकिन किसी जीवित राष्ट्रप्रमुख को सीधे ताबूत में दिखाकर जान से मारने की धमकी देना बेहद दुर्लभ और चिंताजनक है.

ईरान इस तरह के प्रतीकात्मक प्रदर्शनों के जरिए देश के भीतर सैन्य गुटों (जैसे रिवोल्यूशनरी गार्ड्स) के समर्थन को मजबूत करने और जनता के बीच राष्ट्रवाद की भावना जगाने का प्रयास कर रहा है. हालांकि, दोनों देशों के बीच रुकी हुई कूटनीति और लगातार होते हवाई हमलों के कारण युद्ध का यह दायरा किसी भी समय बेहद भयावह रूप ले सकता है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल आपूर्ति (हॉर्मुज जलडमरूमध्य संकट) पर गहरा असर पड़ना तय है.