Iran-US Peace Talks: जंग को लेकर दुनिया में बढ़ी चिंता, इस्लामाबाद में विफल रही अमेरिका-ईरान शांति वार्ता, बिना किसी समझौते के लौटे प्रतिनिधिमंडल; VIDEO
ईरानी मीडिया और सरकारी सूत्रों ने हालांकि वार्ता के बेनतीजा रहने के लिए अमेरिका की 'अतार्किक मांगों' को जिम्मेदार ठहराया है। दोनों देशों के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), परमाणु अधिकारों और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे जटिल मुद्दों पर गंभीर मतभेद बने हुए हैं।
Iran-US Peace Talks: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आयोजित अमेरिका और ईरान के बीच उच्च-स्तरीय शांति वार्ता बिना किसी ठोस नतीजे के शनिवार को समाप्त हो गई है. 21 घंटे तक चली इस मैराथन बैठक के बाद, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने पुष्टि की है कि दोनों पक्ष किसी भी समझौते पर नहीं पहुँच सके. इस विफलता के बाद दोनों देशों के नेता अपने-अपने वतन वापस लौट गए हैं.
वार्ता क्यों रही विफल?
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि बातचीत की विफलता का मुख्य कारण ईरान का अमेरिकी शर्तों को स्वीकार न करना था। वेंस ने कहा कि वाशिंगटन ईरान से इस बात की एक बुनियादी प्रतिबद्धता चाहता था कि वह परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा, जिसे उन्होंने अमेरिका का मुख्य लक्ष्य बताया। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि उन्होंने समझौते के लिए पूरी लचीलापन दिखाई थी, लेकिन ईरान की ओर से कोई सकारात्मक रुख नहीं मिला. यह भी पढ़े: Iran-US Ceasefire: डोनाल्ड ट्रंप ने की 14 दिनों के सीजफायर की घोषणा, ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने को तैयार
ईरानी मीडिया और सरकारी सूत्रों ने हालांकि वार्ता के बेनतीजा रहने के लिए अमेरिका की 'अतार्किक मांगों' को जिम्मेदार ठहराया है। दोनों देशों के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), परमाणु अधिकारों और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे जटिल मुद्दों पर गंभीर मतभेद बने हुए हैं.
जंग को लेकर दुनिया में बढ़ी चिंता
वेंस का कड़ा रुख
वार्ता के बाद पत्रकारों से बात करते हुए उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा, "यह दुखद है कि हम किसी समझौते पर नहीं पहुँच सके. मुझे लगता है कि यह अमेरिका की तुलना में ईरान के लिए अधिक बुरी खबर है।" वेंस ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिकी टीम ने अच्छी नीयत के साथ बातचीत में हिस्सा लिया था, लेकिन दुर्भाग्य से कोई प्रगति नहीं हो पाई.
भविष्य पर अनिश्चितता के बादल
यह बैठक एक दशक से अधिक समय में अमेरिका और ईरान के बीच पहली सीधी बातचीत थी, और 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से उच्चतम स्तर की चर्चा मानी जा रही थी। विश्लेषकों का मानना है कि इस वार्ता के विफल होने से क्षेत्र में जारी तनाव और अनिश्चितता के लंबे समय तक बने रहने का खतरा बढ़ गया है.
होर्मुज जलडमरूमध्य, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग है, पर ईरान का नियंत्रण और दोनों देशों के बीच का यह गतिरोध अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा कीमतों और सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या भविष्य में बातचीत के रास्ते फिर से खुलेंगे या संघर्ष और गहराएगा.