रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) ने गुरुवार को यूरोपीय नेताओं और NATO पर जमकर हमला बोला. उन्होंने कहा कि यूरोप रूस पर झूठे आक्रमण के आरोप लगाकर "युद्ध उन्माद" फैला रहा है. पुतिन ने इसे "हवा में से निकली बकवास" करार दिया और चेतावनी दी कि अगर रूस को उकसाया गया तो उसकी प्रतिक्रिया कड़ी और निर्णायक होगी. पुतिन ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के भारत पर लगाए गए टैरिफ को भी खारिज किया. उन्होंने कहा कि भारत और चीन स्वाभिमानी राष्ट्र हैं और कोई भी शक्ति इन्हें अपमानित नहीं कर सकती. पुतिन ने कहा कि इन देशों पर दबाव डालने की कोशिश अमेरिका पर ही उल्टी पड़ेगी और उसकी अर्थव्यवस्था पर असर डालेगी.
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भारत यात्रा की तैयारी
सूत्रों के अनुसार, पुतिन 5-6 दिसंबर को भारत दौरे पर आ सकते हैं. इस दौरान उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात होगी. दोनों देशों के बीच यह वार्षिक शिखर सम्मेलन होगा, जिसमें रक्षा, सुरक्षा, व्यापार और ऊर्जा सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा की जाएगी. पिछली बार पुतिन 2021 में भारत आए थे.
रूस-भारत की रणनीतिक साझेदारी
भारत और रूस के रिश्ते हमेशा से मजबूत रहे हैं. दोनों देशों के बीच "विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी" है. भारत पहले ही रूस से S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की तीन खेप ले चुका है और बाकी दो की डिलीवरी 2026 तक पूरी हो जाएगी. यह डील 2018 में 5 अरब डॉलर की लागत से हुई थी.
ऊर्जा और तेल पर अमेरिकी दबाव बेअसर
अमेरिका ने भारत पर रूसी तेल खरीद को लेकर दबाव बनाया और भारतीय सामान पर 50% तक टैरिफ़ लगा दिया. लेकिन भारत ने साफ कहा कि उसकी ऊर्जा ज़रूरतें राष्ट्रीय हित और बाज़ार की स्थिति से तय होती हैं. पुतिन ने भी भारत की इस नीति का समर्थन किया और कहा कि ऊर्जा सहयोग भारत-रूस संबंधों की रीढ़ है.
भारत-रूस रिश्ते का संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में पुतिन से कहा था कि 140 करोड़ भारतीय दिसंबर में उनके स्वागत के लिए उत्सुक हैं. यह इस बात का प्रतीक है कि भारत और रूस हर मुश्किल समय में एक-दूसरे के साथ खड़े रहे हैं.













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