नई दिल्ली: पाकिस्तान (Pakistan) में ईधन की कमी (Fuel shortage in Pakistan) और आर्थिक संकट की वजह से एयरलाइन का कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है. पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (Pakistan International Airlines) बंद होने की कगार पर पहुंच गया है. फंड की समस्या के कारण पिछले 10 दिनों में पाकिस्तान एयरलाइंस की 300 उड़ानें रद्द कर दी गई हैं.
पाकिस्तान स्टेट ऑयल (PSO) ने बकाया भुगतान न होने पर फ्यूल सप्लाई में कटौती की है. जिसकी वजह से PIA ने 14 अक्टूबर से 322 उड़ानें कैंसल कर दीं, जिनमें से 134 इंटरनेशनल रूट पर थीं. मंगलवार को पीआईए ने 21 घरेलू उड़ानों सहित 51 उड़ानें रद्द की थी. Al-Azizia Case: पाकिस्तान के पूर्व PM नवाज शरीफ को अल-अजीजिया मामले में बड़ी राहत, पंजाब अंतरिम कैबिनेट ने सजा को किया निलंबित
The #PakistanInternationalAirlines canceled over 300 flights in the past ten days. Watch video to know what's happening pic.twitter.com/xdvL4mcvjS
— Hindustan Times (@htTweets) October 25, 2023
उड़ानें कैंसिल होने की वजह से पैसेंजर्स को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस के प्रवक्ता ने बताया कि मैनेज्मेंट पैसेंजर्स को वैकल्पिक उड़ानों का विकल्प देने की कोशिश कर रहा है. अंतरिम सरकार ने कहा है कि वह सरकारी कंपनियों के लिए व्यापक निजीकरण योजना के हिस्से के रूप में एयरलाइन को बेच देगी.
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार PIA पर 743 अरब रुपये (लगभग 2.5 अरब डॉलर) का कर्ज है, जो उसकी कुल संपत्ति से पांच गुना अधिक है. PIA 1955 में अस्तित्व में आया जब सरकार ने घाटे में चल रही एक कमर्शियल एयरलाइन का राष्ट्रीयकरण किया और 1990 के दशक तक तेजी से विकास किया. बाजार के उदारीकरण और कई निजी और सार्वजनिक स्वामित्व वाली एयरलाइनों के लॉन्च ने पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइन पर भारी दबाव डाला, जिसकी वजह से यह घाटे में चला गया.
पीआईए के प्रवक्ता अब्दुल्ला हफीज खान ने आसन्न बंद होने की खबरों का खंडन किया है, लेकिन एयरलाइन की वित्तीय स्थिति अभी भी बहुत अनिश्चित है. एयरलाइन पर भारी कर्ज का बोझ है और यह पाकिस्तान और खाड़ी क्षेत्र के मार्गों पर निजी एयरलाइनों के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए संघर्ष कर रही है.
पीआईए को बचाने के लिए पाकिस्तानी सरकार के पास कई विकल्प उपलब्ध हैं. सरकार बेलआउट पैकेज दे सकती है, एयरलाइन के कर्ज का पुनर्गठन कर सकती है या इसकी कुछ संपत्ति बेच सकती है. हालांकि इनमें से कोई भी विकल्प महंगा और राजनीतिक रूप से कठिन होगा. यदि सरकार आवश्यक परिवर्तन करने को तैयार नहीं है, तो पीआईए के दिवालिया होने की संभावना है.