नॉर्ड स्ट्रीम पाइपलाइन पर हमले को तीन साल हो चुके हैं. जर्मनी के पास दो संदिग्धों के नाम हैं. एक इटली की जेल में है, दूसरा पोलैंड में हिरासत में है. क्या मुकदमा चलाने के लिए उन्हें जर्मनी लाने की कोशिश कामयाब होगी?नॉर्ड स्ट्रीम पाइपलाइन पर हमले के एक संदिग्ध को जर्मनी के सुपुर्द करने का रास्ता साफ हो सकता है. इटली की एक अदालत ने फिर से संदिग्ध के प्रत्यर्पण की अनुमति दे दी है. आरोप है कि संदिग्ध सरही के. साल 2022 में पाइपलाइन पर किए गए हमले के मुख्य मास्टरमाइंडों में से एक है.
जर्मन जांचकर्ताओं ने मुकदमा शुरू करने के लिए संदिग्ध को जर्मनी लाए जाने का आग्रह किया था. सितंबर में बोलोन्या की एक अदालत ने प्रत्यर्पण को मंजूरी दी. आरोपी के वकील ने इटली की सुप्रीम कोर्ट में इसके खिलाफ अपील की. सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत का फैसला खारिज करते हुए प्रत्यर्पण पर लिए रोक लगा दी.
नॉर्ड स्ट्रीम केस में यूक्रेनी गोताखोर को पकड़ नहीं पाया जर्मनी
सुप्रीम कोर्ट ने केस वापस बोलोन्या कोर्ट में भेजा. वहां इस मामले पर फिर से विचार करने के बाद एक्सट्राडिशन की अनुमति दे दी गई. हालांकि, डिफेंस के वकील ने कहा है कि वह एक बार और सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे. उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया में गंभीर उल्लंघन का भी आरोप लगाया है.
उक्त आरोपी यूक्रेन का निवासी है. एक यूरोपीय गिरफ्तारी वारंट के आधार पर इसी साल गर्मियों में उसे इटली में गिरफ्तार किया गया था. वह अपनी पत्नी और बच्चों के साथ इटली में छुट्टी मना रहा था. उसे इटली की एक उच्च सुरक्षा वाली जेल में बंद रखा गया है. वह खुद पर लगे आरोपों से इनकार करता है. उसका दावा है कि हमले के समय वह यूक्रेन में था.
नॉर्ड स्ट्रीम पाइपलाइन क्या थी?
नॉर्ड स्ट्रीम सिस्टम में दो पाइपलाइन थीं, नॉर्ड स्ट्रीम 1 (एनएस1) और नॉर्ड स्ट्रीम 2 (एनएस2). रूस की कंपनी गाजप्रोम ने इसका निर्माण किया था, ताकि बाल्टिक सागर से होते हुए जर्मनी को गैस भेजी जा सके. एनएस1 का निर्माण अप्रैल 2010 में शुरू हुआ. एक साल के भीतर यह तैयार हो गया. नवंबर 2011 में पाइपलाइन से गैस का फ्लो शुरू कर दिया गया.
एनएस2 भी सितंबर 2021 में बनकर तैयार हो गया, मगर इससे गैस की आपूर्ति कभी हुई नहीं. अमेरिका और बाल्टिक देशों समेत जर्मनी के कई सहयोगी इस पाइपलाइन से खुश नहीं थे. भारी तनाव के बीच जर्मनी ने आपूर्ति प्रक्रिया को दी गई अनुमति रद्द कर दी. कुछ ही दिनों बाद फरवरी 2022 में रूस ने यूक्रेन पर हमला कर दिया. यूक्रेन युद्ध के कारण बदली हुई परिस्थितियों में रूसी गैस पर यूरोप की अति निर्भरता, एक बड़ा राजनीतिक और कूटनीतिक मसला बन गई.
पाइपलाइन में विस्फोट कब हुआ?
26 सितंबर, 2022 को स्वीडन के भूकंपविज्ञानियों ने समुद्र के नीचे कई विस्फोट दर्ज किए. करीब 17 घंटे की अवधि में समुद्र के भीतर कई धमाके हुए. ये विस्फोट डेनमार्क के एक द्वीप बॉनहॉल्म के नजदीक हुए. ब्लास्ट के कारण एनएस की चार में से तीन पाइपलाइन फट गईं.
गाजप्रोम ने बताया कि इस घटना के कारण करीब 80 करोड़ घन मीटर गैस (समूचे डेनमार्क की तीन महीने की गैस खपत के बराबर मात्रा) बर्बाद हो गई. गैस लीकेज को रोकने में कई दिन लग गए. पाइपलाइन को इतना गंभीर नुकसान हुआ कि उससे गैस सप्लाई कभी नहीं हो सकेगी.
नॉर्ड स्ट्रीम धमाके में यूक्रेन समर्थक गुट पर शक
किसी ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली. डेनमार्क और स्वीडन अपनी जांच के बाद इस नतीजे पर पहुंचे कि जान-बूझकर कर तोड़-फोड़ की गई. हालांकि, जांच में किसी संदिग्ध की पहचान नहीं की गई. मगर, अंतरराष्ट्रीय मीडिया में कुछ जगहों पर दावा किया गया कि हमले के पीछे एक यूक्रेन समर्थक समूह का हाथ है.
जर्मन जांचकर्ताओं का क्या आरोप है?
जर्मन जांचकर्ताओं का आरोप है कि इटली में गिरफ्तार किया गया संदिग्ध सरही, उस ग्रुप का हिस्सा था जिसने बॉनहॉल्म के नजदीक पाइपलाइन पर विस्फोटक लगाए थे. जांचकर्ताओं के मुताबिक, सरही और उसके साथियों ने एक यॉट किराये पर ली.
इस नाव का नाम था, एंड्रोमेडा. ये लोग 6 सितंबर 2022 को जर्मनी के उत्तर-पूर्वी समुद्रतट पर रॉस्टॉक से रवाना हुए और बाल्टिक सागर में दाखिल हुए. यॉट 23 सितंबर 2022 को वापस लौटा. आरोप है कि सरही के. सात लोगों के इस ग्रुप का नेतृत्व कर रहा था और इनमें चार गोताखोर थे.
खबरों के मुताबिक, जर्मनी लौटकर आने से पहले इसे डेनमार्क में विस्फोट वाली जगह के पास एक द्वीप पर भी देखा गया था. इसके अलावा स्वीडन के एक बंदरगाह और पोलैंड में भी यह नजर आया था. जनवरी 2023 में जर्मन जांचकर्ताओं ने संबंधित यॉट पर छापा मारा. मीडिया खबरों के मुताबिक, उन्हें नाव पर उन्हीं विस्फोटकों के अंश मिले जो स्वीडिश जांचकर्ताओं को घटनास्थल पर मिले थे.
आरोपी सरही के अलावा इस केस का एक और संदिग्ध, वोलोदिमीर जेड. पोलैंड में हिरासत में है. जर्मनी उसे भी ट्रायल के लिए लाना चाहता है, लेकिन पोलैंड की एक अदालत ने फैसला सुनाया कि संदिग्ध को जर्मनी नहीं भेजा जा सकता है. वोलोदिमीर जेड. भी यूक्रेन का निवासी है.













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