तेल अवीव, इज़राइल: गुरुवार तड़के ईरान की एक मिसाइल दक्षिणी इज़राइल के मुख्य अस्पताल पर गिरी, जिससे कई लोग घायल हो गए और अस्पताल को "व्यापक नुकसान" पहुँचा. इज़राइली मीडिया ने टूटी हुई खिड़कियों और भारी काले धुएं के फुटेज दिखाए.
एक और मिसाइल तेल अवीव के पास एक ऊंची इमारत और कई अन्य रिहायशी इमारतों से टकराई. इज़राइल की बचाव सेवा के अनुसार, इन हमलों में कम से कम 40 लोग घायल हुए हैं.
इज़राइल का जवाबी हमला
जवाब में, इज़राइल ने भी ईरान के अराक हेवी वॉटर रिएक्टर पर हमला किया. यह हमला ईरान के परमाणु कार्यक्रम को निशाना बनाने की एक और कोशिश थी. यह संघर्ष सात दिनों से चल रहा है, जिसकी शुरुआत इज़राइल के हवाई हमलों से हुई थी.
ईरान ने इज़राइल पर सैकड़ों मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं. हालांकि, इज़राइल के एडवांस्ड एयर डिफेंस सिस्टम ने ज़्यादातर हमलों को नाकाम कर दिया है, लेकिन इज़राइली अधिकारियों ने माना है कि यह सिस्टम पूरी तरह से अचूक नहीं है.
JUST IN: Iranian missile hits hospital in southern Israel pic.twitter.com/fuvvXnp1RC
— BNO News Live (@BNODesk) June 19, 2025
अस्पताल में भारी नुकसान
हमले का शिकार हुआ सोरोका मेडिकल सेंटर 1000 से ज़्यादा बिस्तरों वाला एक बड़ा अस्पताल है, जो दक्षिणी इज़राइल के लगभग 10 लाख लोगों को स्वास्थ्य सेवाएँ देता है.
अस्पताल के बयान के मुताबिक, मेडिकल सेंटर के कई हिस्सों को नुकसान पहुँचा है और इमरजेंसी रूम में कई मामूली रूप से घायलों का इलाज चल रहा है. अस्पताल को जानलेवा मामलों को छोड़कर सभी नए मरीजों के लिए बंद कर दिया गया है.
इज़राइल के कई अस्पतालों ने पिछले हफ़्ते आपातकालीन योजनाएँ लागू कर दी थीं. उन्होंने भूमिगत पार्किंग को अस्पताल के वार्ड में बदल दिया है और मरीज़ों को ज़मीन के नीचे शिफ़्ट कर दिया है, खासकर उन मरीज़ों को जो वेंटिलेटर पर हैं.
परमाणु रिएक्टर पर हमले के बाद 'रेडिएशन का खतरा नहीं'
इज़राइली सेना ने कहा कि उसके लड़ाकू विमानों ने अराक फैसिलिटी को निशाना बनाया ताकि वहां प्लूटोनियम का उत्पादन रोका जा सके, जिसका इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने में हो सकता है.
वहीं, ईरानी सरकारी टीवी ने कहा कि अराक साइट पर हमले से "रेडिएशन का कोई खतरा नहीं है". एक रिपोर्टर ने बताया कि फैसिलिटी को खाली करा लिया गया था और आसपास के नागरिक इलाकों को कोई नुकसान नहीं हुआ है.
क्या है पूरा मामला?
यह हमला दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव का नतीजा है.
- ईरान का परमाणु कार्यक्रम: ईरान हमेशा कहता आया है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है. हालांकि, वह यूरेनियम को 60% तक समृद्ध कर रहा है, जो हथियार-ग्रेड स्तर (90%) से बस एक छोटा कदम दूर है.
- इज़राइल का रुख: इज़राइल मध्य पूर्व में एकमात्र परमाणु-सशस्त्र देश है, लेकिन वह इसे स्वीकार नहीं करता. वह ईरान के परमाणु कार्यक्रम को अपने लिए एक बड़ा खतरा मानता है.
- जान-माल का नुकसान: एक मानवाधिकार समूह के अनुसार, ईरान में अब तक 639 लोग मारे गए हैं, जिनमें 263 आम नागरिक शामिल हैं. वहीं, ईरान के हमलों में इज़राइल में कम से कम 24 लोग मारे गए हैं और सैकड़ों घायल हुए हैं.
- अराक रिएक्टर का इतिहास: 2015 के परमाणु समझौते के तहत इस रिएक्टर को फिर से डिज़ाइन किया जा रहा था ताकि इससे परमाणु हथियार बनाने का खतरा कम हो सके. लेकिन 2018 में अमेरिका इस समझौते से हट गया था.
अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA), जो संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था है, इज़राइल से ईरानी परमाणु स्थलों पर हमला न करने का आग्रह करती रही है.













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