रूस में ईंधन की भारी कमी और यूक्रेन के ड्रोन हमलों के कारण क्रेमलिन ने पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर साल के अंत तक रोक लगा दी है. रूसी डिप्टी प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने घोषणा की कि घरेलू जरूरतों को देखते हुए यह कदम उठाना पड़ा है. नोवाक ने माना कि पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई में “थोड़ी कमी” आई है, लेकिन उन्होंने दावा किया कि “इसे रिजर्व से पूरा किया जा रहा है.” इसके बावजूद रिपोर्ट्स सामने आ रही हैं कि रूस के कई इलाकों और कब्जे वाले क्रीमिया में हालात बिगड़ते जा रहे हैं.
यूक्रेन के ड्रोन हमलों से सप्लाई चेन ध्वस्त
यूक्रेन ने रूसी ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाना तेज़ कर दिया है. तेल रिफाइनरी, स्टोरेज साइट्स और पंपिंग स्टेशनों पर हमलों की वजह से सप्लाई चेन बाधित हो गई है. हाल ही में गैज़प्रोम की बशकोर्तोस्तान स्थित बड़ी रिफाइनरी पर हमला हुआ.
शुरुआत में रूस ने कमी के पीछे “लॉजिस्टिक दिक्कतें” बताईं, लेकिन अब पेट्रोल पंप पर लंबी कतारें और राशनिंग की खबरें सामने आ रही हैं.
क्रीमिया में सबसे बुरा हाल
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक क्रीमिया में लगभग आधे पेट्रोल पंप बंद हो गए हैं. सेवस्तोपोल शहर में पेट्रोल पूरी तरह खत्म हो गया और टैंकर आते ही कुछ घंटों में खाली हो जाते हैं. कीमतों में भी पिछले महीने की तुलना में करीब 30% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
रूस के लिए बड़ा झटका
रूस दुनिया के सबसे बड़े डीजल उत्पादकों में से एक है और ऊर्जा निर्यात उसकी अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा है. इस साल मार्च और जुलाई में भी रूस ने आंशिक तौर पर पेट्रोल निर्यात पर रोक लगाई थी, लेकिन अब जो पूरी तरह का बैन लगाया गया है, वह यह दिखाता है कि यूक्रेन के हमलों से रूस को कितना गहरा झटका लगा है.













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