US: अमानवीय व्यवहार! अमेरिका में 30 साल से रह रही थीं 73 वर्षीय हरजीत कौर, ICE ने धोखे से बुलाकर भेज दिया भारत
Harjeet Kaur Deported From US (Photo- @vani_mehrotra/X)

US Immigration Controversy: अमेरिका में 30 साल से रह रही 73 साल की सिख महिला हरजीत कौर को अचानक भारत डिपोर्ट कर दिया गया. वे गुरुवार शाम अन्य 131 लोगों के साथ दिल्ली एयरपोर्ट (Delhi Airport) पहुंचीं. कैलिफोर्निया में रहने वाली इस बुजुर्ग महिला को इमिग्रेशन और कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) ने पहले अतिरिक्त कागजात के बहाने सैन फ्रांसिस्को दफ्तर बुलाया और फिर सीधे बेकर्सफील्ड के डिटेंशन सेंटर (Bakersfield Detention Center) भेज दिया. पीड़िता का दावा है कि अमेरिकी अधिकारियों ने, उन्हें अपने बच्चों और पोते-पोतियों से अलविदा कहने का भी मौका नहीं दिया.

कौर नाम की यह महिला 1992 से अमेरिका में रह रही थी. उसने अपने दो बेटों की परवरिश अकेले ही की और अब उसके दो पोते और तीन नातिनें हैं.

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अधिकारियों द्वारा प्रताड़ना का आरोप

कौर के वकील दीपक अहलूवालिया ने गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका दावा है कि निर्वासित लोगों के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया. एक अमेरिकी अधिकारी तो हरजीत कौर को हथकड़ी (Harjeet Kaur Handcuffed) और बेड़ियां भी लगाना चाहता था, लेकिन एक अन्य अधिकारी ने उसकी उम्र का हवाला देकर उसे रोक दिया.

वकील ने यह भी दावा किया कि कौर को किसी कॉमर्शियल फ्लाइट से नहीं बल्कि ICE द्वारा चार्टर्ड छोटे विमान से भारत भेजा गया.

सदमे में है पीड़ित का परिवार

कौर के अचानक भारत निर्वासित किए जाने से परिवार सदमे में है. परिवार का कहना है कि वह अमेरिकी अधिकारियों के सामने गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन उन्होंने एक नहीं सुनी. कौर के परिवार ने बताया कि उन्हें डिटेंशन सेंटर में बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिलीं. उन्हें जमीन पर सोना पड़ा और नहाने की भी अनुमति नहीं दी गई. उनके घुटनों की पहले ही सर्जरी हो चुकी है, ऐसे में जमीन से उठना उनके लिए बेहद मुश्किल था.

उन्होंने बताया कि कौर की सेहत बिगड़ रही है. वह थायरॉइड की समस्या, माइग्रेन, घुटनों के दर्द और गंभीर चिंता से पीड़ित है. इसलिए, हिरासत में रखना उनके स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हो सकता था.

अमेरिकी सांसद ने की आलोचना

कौर के रिश्तेदारों और समुदाय के सैकड़ों सदस्यों ने उनकी तत्काल रिहाई की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन भी किया. प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि इस कार्रवाई ने न केवल परिवार को तोड़ दिया, बल्कि एक बुजुर्ग महिला के मूल अधिकारों का भी हनन किया.

इस बीच, अमेरिकी सांसद जॉन गारामेंडी (US Congressman John Garamendi) ने कौर की डिपोर्टेशन पर कड़ी आलोचना की. उन्होंने कहा कि "एक 73 साल की महिला, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और जो समुदाय में सम्मानित हैं, उन्हें निशाना बनाना गलत है."