National Sports Governance Bill Passed: लोकसभा ने 11 अगस्त 2025(सोमवार) को राष्ट्रीय खेल शासन विधेयक और राष्ट्रीय ड्रग परीक्षण संशोधन विधेयक पारित कर दिया है, जो भारत में एक पारदर्शी और विश्व स्तरीय खेल इकोसिस्टम बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुधारों का हिस्सा हैं. खेल एवं युवा मामले मंत्री मनसुख मांडविया के अनुसार, ये बिल हाल ही में भारत के ऑलंपिक मेजबानी की तैयारी को ध्यान में रख कर लाए गए हैं. अब भारत के सबसे धनी क्रिकेट संगठन बोर्ड ऑफ कंट्रोल फॉर क्रिकेट इन इंडिया (BCCI) भी इस नए विधेयक के तहत आएगा. मद्रास हाईकोर्ट ने एमएस धोनी के 100 करोड़ रुपये के मानहानि मुकदमे की सुनवाई का दिया आदेश, IPL सट्टेबाजी आरोपों पर 10 साल पुराने मामले में बड़ी कार्रवाई
राष्ट्रीय खेल शासन विधेयक क्या है?
राष्ट्रीय खेल शासन विधेयक राष्ट्रीय खेल संघों (NSFs) के सुचारू और न्यायसंगत संचालन के लिए कानूनी ढांचा प्रदान करता है. यह विधेयक एथलीटों की सुरक्षा के लिए सुरक्षित खेल प्रोटोकॉल और शिकायत निवारण प्रणाली को मजबूत करेगा. इसके अलावा, खेल नीति और नैतिकता को बढ़ावा देगा और प्रशासनिक विवादों का समाधान करने के लिए एक मानकीकृत संरचना स्थापित करेगा. यह विधेयक भारत के खेल प्रशासन में दशकों से प्रमुख समस्याओं जैसे कि विवाद निवारण निकाय की कमी, खेल संगठनों में एथलीटों का कमजोर प्रतिनिधित्व और नेतृत्व में लैंगिक असंतुलन से निपटने के लिए बनाया गया है.
इसके अंतर्गत राष्ट्रीय खेल न्यायाधिकरण भी गठित किया जाएगा, जो नागरिक न्यायालय की शक्तियों के साथ चयन और चुनाव संबंधी मामलों का निपटारा करेगा, जिसमें एथलीट तथा बोर्ड शामिल हैं. हालांकि, अधिनियम के निर्णय के खिलाफ अपील केवल भारत के सर्वोच्च न्यायालय में ही की जा सकेगी.
BCCI पर राष्ट्रीय खेल शासन विधेयक का प्रभाव
BCCI, जो कि क्रिकेट का निजी नियामक संगठन है, अब इस विधेयक के अधीन आ जाएगा. इसके तहत BCCI और उसकी राज्य संघ समितियों के सभी वर्तमान और भविष्य के कानूनी मामले राष्ट्रीय खेल न्यायाधिकरण के माध्यम से सुलझाए जाएंगे, और वे सीधे अदालतों का रुख नहीं कर सकेंगे. विधेयक ने BCCI के प्रशासकों के लिए आयु सीमा में भी कुछ छूट दी है; 70 से 75 वर्ष के बीच के प्रशासक अंतरराष्ट्रीय निकाय की अनुमति से चुनाव में भाग ले सकते हैं. इसका मतलब है कि वर्तमान BCCI अध्यक्ष रोजर बिन्नी, जो हाल ही में 70 वर्ष के हुए हैं, वे अपनी पदाधिकारी भूमिका जारी रख सकते हैं.
BCCI के लिए विशेष छूट
राष्ट्रीय खेल शासन विधेयक के प्रारंभिक मसौदे में BCCI को सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत भी लाया जाना था. लेकिन चूंकि BCCI केंद्र सरकार से कोई वित्तीय सहायता प्राप्त नहीं करता, इसलिए RTI का प्रावधान BCCI से हटा दिया गया है. इसके अलावा, विधेयक में नियमों और अन्य प्रावधानों का पालन BCCI को भी करना होगा, जिससे यह भारत के खेल प्रशासन के मानकों के अनुरूप कार्य करेगा.
इस प्रकार, राष्ट्रीय खेल शासन विधेयक भारत के खेल प्रशासन में एक बड़ा सुधार है, जो न केवल खेल संघों में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देगा, बल्कि BCCI जैसे प्रमुख निकायों को भी एक संगठित और नियंत्रित प्रणाली के अधीन लाएगा. इससे भारतीय खेल का भविष्य उज्जवल और व्यवस्थित होगा.













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