भारत में अनेक भाषाएं हैं, भाषा अलग-अलग है तो क्या हुआ भाव तो एक ही है, भारतवर्ष की एकात्मता इस भाव में है। दुनिया में जैसे जगन्नाथ पुरी के जगन्नाथ जी जैसे दूसरे नहीं हैं, वैसे ही भारत जैसा दूसरा नहीं है: अहमदाबाद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत (21.4.22)— ANI_HindiNews (@AHindinews) April 21, 2022
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