World's Oldest Baby: अमेरिका में पैदा हुआ दुनिया का सबसे बूढ़ा बच्चा, 30 साल तक फ्रीजर में रखे भ्रूण से लिया जन्म
संयुक्त राज्य अमेरिका में दुनिया के सबसे बूढ़े बच्चे का हाल ही में जन्म हुआ है. सबसे पुराने भ्रूण से पैदा हुआ यह बच्चा चर्चा का विषय बना हुआ है. MIT टेक्नोलॉजी रिव्यू की रिपोर्ट के अनुसार, 26 जुलाई को दुनिया में प्रवेश करने वाले थैडियस डैनियल पियर्स का जन्म एक ऐसे भ्रूण से हुआ था, जिसे लगभग 30 वर्षों तक फ्रीजर में रखा गया था.
World's Oldest Baby: संयुक्त राज्य अमेरिका (United States) में दुनिया के सबसे बूढ़े बच्चे (World's Oldest Baby) का हाल ही में जन्म हुआ है. सबसे पुराने भ्रूण (Oldest Embryo) से पैदा हुआ यह बच्चा चर्चा का विषय बना हुआ है. MIT टेक्नोलॉजी रिव्यू की रिपोर्ट के अनुसार, 26 जुलाई को दुनिया में प्रवेश करने वाले थैडियस डैनियल पियर्स (Thaddeus Daniel Pierce) का जन्म एक ऐसे भ्रूण से हुआ है, जिसे लगभग 30 वर्षों तक फ्रीजर में रखा गया था. उस भ्रूण (Embryo) को उसकी जैविक मां से ‘गोद’ लिया गया था, जिसने उसे 1994 से जमाकर रखा था. यह भ्रूण ओहायो (Ohio) में रहने वाले लिंडसे (Lindsey) और टिम पियर्स (Tim Pierce) ने लिया था. नवंबर 2024 में इसे लिंडसे के गर्भाशय में स्थानांतरित कर दिया गया, जिसने सप्ताहांत में बच्चे थैडियस को जन्म दिया. जब भ्रूण बनाया गया था, तब उसके दत्तक पिता टिम केवल एक बच्चा थे और थैडियस की एक जैविक बहन भी है जो अब 30 वर्ष की है और उसकी अपनी 10 वर्षीय बेटी है.
दत्तक माता लिंडसे पियर्स ने टेक्नोलॉजी रिव्यू को बताया- ‘वह बहुत शांत है. हमें इस अनमोल बच्चे के होने पर बहुत खुशी है.’ यह सब इसलिए संभव हुआ क्योंकि जैविक माता और दत्तक माता-पिता, दोनों को एक ईसाई ‘भ्रूण दत्तक ग्रहण’ (Embryo Adoption) एजेंसी ने आपस में जोड़ दिया था. यह भी पढ़ें: महाराष्ट्र में दुर्लभ मेडिकल केस! गर्भवती महिला में भ्रूण के अंदर मिला दूसरा भ्रूण, डॉक्टर भी हैरान
बच्चे का जन्म कैसे हुआ?
टेक्नोलॉजी रिव्यू की रिपोर्ट के अनुसार, बच्चे के जैविक माता और पिता ने 1990 के दशक में आईवीएफ उपचार करवाया था. उन्होंने चार स्वस्थ भ्रूण बनाए, लेकिन मां लिंडा आर्चर्ड ने उनमें से केवल एक को ही स्थानांतरित करवाया, जो अब थैडियस की 30 वर्षीय जैविक बहन बन गई.
बाकी तीन भ्रूणों को इस उम्मीद में जमा कर दिया गया कि एक दिन उनका एक और बच्चा होगा, लेकिन हालात बदल गए, लिंडा और उनके पति अलग हो गए और जब वह रजोनिवृत्ति की अवस्था में पहुंचीं, तो उन्होंने भ्रूणों के भविष्य का पुनर्मूल्यांकन करने का फैसला किया.
ईसाई धर्म का पालन करने वाली लिंडा ने भ्रूणों को विज्ञान को दान करने या किसी अज्ञात जोड़े को देने के बजाय, भ्रूणों को दान करने का फैसला किया. इसके बजाय उन्होंने ‘भ्रूण गोद लेने’ का विकल्प चुना, जिससे उन्हें भावी माता-पिता के बारे में अपनी राय रखने का मौका मिला और इस प्रक्रिया की देखरेख एक धार्मिक एजेंसी द्वारा की गई.
नाइटलाइट क्रिश्चियन एडॉप्शन्स ने भ्रूणों को अपने पास रख लिया और उन्हें लिंडसे और टिम पियर्स के पास रख दिया. वे लिंडा के विवाहित, कोकेशियान ईसाई जोड़े के मानदंडों पर खरे उतरे और आगे चलकर उन्होंने थैडियस को जन्म दिया, जिससे उसका नाम बाइबिल में वर्णित हो गया.
एक भ्रूण का विकास रुक गया, दो को लिंडसे के गर्भाशय में स्थानांतरित कर दिया गया और एक भ्रूण के रूप में विकसित हुआ. थेडियस के जन्म के बाद अब 62 वर्षीय लिंडा ने टेक्नोलॉजी रिव्यू को बताया कि वह अपनी बड़ी बहन जैसा दिखता है. जब लिंडसे ने मुझे उसकी तस्वीरें भेजीं तो सबसे पहले मैंने देखा कि वह मेरी बेटी जैसा दिखता है जब वह बच्ची थी. यह भी पढ़ें: World Embryologist Day 2025: कब और क्यों मनाया जाता है विश्व भ्रूण विज्ञानी दिवस? जानें फर्टिलाइजेशन के कुछ एक्साइटेड फैक्ट!
ईसाई भ्रूण गोद लेने वाली एजेंसियां
थैडियस से पहले, 27 और 30 साल पुराने भ्रूणों से अन्य बच्चे पैदा हुए थे, लेकिन ऐसे मामले दुर्लभ हैं, क्योंकि बहुत कम संगठन पुराने भ्रूणों को लेने के लिए तैयार होते हैं, क्योंकि उन्हें संग्रहीत करने के समय और तरीके को लेकर चिंता होती है.
पियर्स दंपत्ति की देखभाल करने वाले आईवीएफ डॉक्टर, जॉन गॉर्डन, जो स्वयं एक ईसाई हैं. उन्होंने भंडारण में रखे भ्रूणों की संख्या कम करने के लिए रेजॉइस फर्टिलिटी क्लिनिक की स्थापना की. अनुमान है कि दुनिया भर में लाखों भ्रूण फ्रीजर में संग्रहीत हैं, जो आईवीएफ प्रक्रियाओं से बचे हुए हैं और अक्सर प्रत्यारोपित भ्रूणों की संख्या से कहीं अधिक भ्रूण उत्पन्न करते हैं.
(The above story first appeared on LatestLY on Aug 01, 2025 12:30 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

