लखनऊ, 14, अगस्त: लखनऊ-बरौनी एक्सप्रेस के एसी कोच में कम कूलिंग की शिकायत पर जो खुलासा हुआ, वह हैरान कर देने वाला था. जब टेक्नीशियन ने एसी डक्ट खोलकर जांच की तो उसके अंदर बड़ी संख्या में शराब की बोतलें छिपी मिलीं. बाद में पूरे कोच की तलाशी ली गई, जिसमें कुल 150 से अधिक बोतलें बरामद हुईं. गौरतलब है कि इस ट्रेन में शराब तस्करी की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं, लेकिन लखनऊ स्टेशन पर यह पहली बार है जब ऐसा मामला पकड़ा गया है. मंगलवार को सेकंड एसी कोच (A-2) की सीट नंबर 40 पर यात्रा कर रहे विपिन कुमार ने कुलिंग न होने की शिकायत की थी. बुढ़वल स्टेशन के आगे तकनीकी स्टाफ ने ट्रेन में चढ़कर जांच शुरू की. जब उन्होंने एक एसी डक्ट खोला, तो उसके भीतर कागज में लिपटी कुछ बोतलें दिखाई दीं. कागज हटाने पर स्पष्ट हुआ कि ये ऑफिसर्स चॉइस ब्रांड की शराब की बोतलें थीं. यह भी पढ़ें: Cancer Warning: अब शराब की बोतलों पर लिखा रहेगा 'कैंसर का खतरा'? चेतावनी लेबल अनिवार्य करने की मांग, HC में जनहित याचिका दायर
यह मामला अब रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और स्थानीय पुलिस के संज्ञान में है, और जांच की जा रही है कि बोतलें कोच में कैसे और कब रखी गईं. आरपीएफ और जीआरपी कर्मियों की मदद से लखनऊ-बरौनी एक्सप्रेस के पूरे एसी कोच के डक्ट की तलाशी ली गई, जिसमें 150 से अधिक शराब की बोतलें बरामद हुईं. आरपीएफ लखनऊ जंक्शन के इंस्पेक्टर अमित राय ने बताया कि जांच गोंडा के पास की गई, जहां 22 पैकेट में छिपाकर रखी गई शराब मिली.
लखनऊ-बरौनी एक्सप्रेस ट्रेन में के एसी डक्ट से बरामद हुई 150 से ज़्यादा शराब की बोतलें
Passengers complained of low cooling in the AC coach of Lucknow-Barauni Express. When the technicians inspected the AC duct, consignment of a illict liquor was being hidden there.
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— Piyush Rai (@Benarasiyaa) August 14, 2025
यह खोज न केवल चौंकाने वाली है, बल्कि गंभीर चिंता का विषय भी है, क्योंकि यह शराब बिहार ले जाई जा रही थी. एक ऐसा राज्य जहां पूर्ण शराबबंदी लागू है. गौर करने वाली बात यह है कि यह इस ट्रेन में शराब तस्करी का पहला मामला नहीं है. इससे पहले मई में भी इसी ट्रेन में एक और बड़ी खेप पकड़ी गई थी, जिसमें करीब 700 टेट्रा पैक बरामद किए गए थे. उस मामले में आरोपी खुद ट्रेन का जनरेटर पावर कार स्टाफ का सदस्य था.
रेलवे और सुरक्षा एजेंसियां अब इस बात की जांच कर रही हैं कि कहीं इसमें कोई अंदरूनी मिलीभगत तो नहीं है.













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