FACT CHECK: यूपी पुलिस के सिपाही ने पहनी सपा की लाल टोपी, योगी सरकार को बर्खास्त करने की मांग की? जानें वायरल वीडियो का सच
सोशल मीडिया पर एक पुराना वीडियो हाल ही का बताकर शेयर किया जा रहा है. वीडियो में यूपी पुलिस का एक सिपाही समाजवादी पार्टी की लाल टोपी पहनकर डीएम से योगी सरकार को बर्खास्त करने की मांग कर रहा है.
UP Police Viral Video Fact Check: सोशल मीडिया पर एक पुराना वीडियो हाल ही का बताकर शेयर किया जा रहा है. वीडियो में यूपी पुलिस का एक सिपाही समाजवादी पार्टी की लाल टोपी पहनकर डीएम से योगी सरकार को बर्खास्त करने की मांग कर रहा है. कई सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे मौजूदा समय का वीडियो मानकर सरकार पर निशाना साधा. हालांकि, फैक्ट चेक से पता चला है कि यह वीडियो असल में 2019 का है, जब मुनेश यादव डीएम ऑफिस पहुंचकर समाजवादी पार्टी की टोपी पहनकर विरोध प्रदर्शन कर रहा था. इस हरकत के बाद उसे अनुशासनहीनता के आरोप में बर्खास्त कर दिया गया था.
पुराने वीडियो को नया बताकर किया जा रहा वायरल
यूपी पुलिस की वर्दी में लाल टोपी पहने व्यक्ति साफ़ साफ़ कह रहा भ्रष्टाचारी सरकार है,
नौकरी की परवाह बाद में। समाजवादी कहीं भी होंगे जनता के लिए लड़ने में पीछे नहीं हटेंगे। pic.twitter.com/zMVuKwkovz
— Ankit Yadav (@Ankitydv92) August 8, 2025
मीडिया रिपोर्ट्स से हुआ खुलासा
कैसे पता चली सच्चाई?
वायरल वीडियो की पड़ताल के लिए हमने गूगल पर 'एसपी की टोपी पहनकर डीएम के पास पहुंचा पुलिसकर्मी' कीवर्ड सर्च किया. इस दौरान हमें jansatta.com, navbharattimes.com, jagran.com और patrika.com की 6 साल पुरानी एक रिपोर्ट मिली, जिसका शीर्षक लगभग एक जैसा था, 'एसपी की लाल टोपी पहनकर डीएम के पास पहुँचा पुलिसकर्मी'.
इतना ही नहीं, हमें इस खबर से जुड़ा एक यूट्यूब लिंक भी मिला, जो जून 2019 में अपलोड किया गया था. इसमें यूपी पुलिस के उस सिपाही का बयान था, जो योगी आदित्यनाथ की सरकार को बर्खास्त करने की मांग कर रहा था.
क्या निकला निष्कर्ष?
जांच में पता चला कि वीडियो का वर्तमान से कोई लेना-देना नहीं है. इसे जानबूझकर गलत संदर्भ में शेयर किया गया ताकि जनता में भ्रम फैलाया जा सके. इस तरह की हरकतें न केवल जनता को गुमराह करती हैं बल्कि माहौल को भी गरमाने का काम करती हैं.
सोशल मीडिया पर इस तरह के पुराने वीडियो को नया बताकर फैलाना अब एक आम रणनीति बन चुकी है. कई बार चुनावी मौसम में या राजनीतिक बहस के बीच इस तरह के क्लिप्स वायरल कर माहौल को प्रभावित करने की कोशिश होती है. यही वजह है कि फैक्ट चेकिंग की अहमियत और बढ़ जाती है.
आंख मूंदकर भरोसा करना सही नहीं
इस मामले ने फिर साबित कर दिया कि इंटरनेट पर दिखने वाली हर चीज पर आंख मूंदकर भरोसा करना सही नहीं है. किसी भी वायरल वीडियो या खबर को सच मानने से पहले उसकी तारीख, स्रोत और संदर्भ जरूर जांचना चाहिए. तभी हम गलत सूचनाओं से बच सकते हैं और असली सच तक पहुंच सकते हैं.
(The above story first appeared on LatestLY on Aug 09, 2025 11:45 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).


