Fact Check: क्या मोदी सरकार हर परिवार को दे रही है मुफ्त कार? PIB फैक्ट चेक ने फेक Instagram वीडियो का किया पर्दाफाश

सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें दावा किया जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी हर भारतीय परिवार को मुफ्त कार दे रहे हैं. पीआईबी फैक्ट चेक ने इस दावे की सच्चाई बताते हुए जनता को सतर्क किया है.

फैक्ट चेक (Photo Credits: X/@PIBFactCheck)

Fact Check: सोशल मीडिया (Social Media) पर आए दिन सरकारी योजनाओं या फिर किसी ऑफर को लेकर फर्जी खबरें (Fake News) फैलाई जाती हैं, जिन्हें लेकर लोग अक्सर भ्रम में आ जाते हैं कि क्या वायरल हो रही खबर (Viral News) सच्ची है या फिर महज एक भ्रम. इसी कड़ी में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम (Instagram) पर इन दिनों एक वीडियो ने खलबली मचा रखी है. इस वीडियो में दावा किया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार देश के हर परिवार को एक 'मुफ्त कार' (Free Car) प्रदान कर रही है. हालांकि, सरकारी सूचना एजेंसी प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) की फैक्ट चेक टीम ने इस दावे की गहराई से जांच की और इसे पूरी तरह से फर्जी और भ्रामक करार दिया है. यह भी पढ़ें: Fact Check: 1 साल की उम्र में अभिनंदन कप के साथ वैभव सूर्यवंशी का फोटो हुआ वायरल, जानिए क्या है पूरी हकीकत?

AI के जरिए बनाया गया 'डीपफेक' वीडियो

पीआईबी फैक्ट चेक के अनुसार, वायरल हो रहे ये वीडियो एआई (Artificial Intelligence) तकनीक का उपयोग करके बनाए गए हैं. जालसाजों ने प्रधानमंत्री के पुराने भाषणों के वीडियो फुटेज लेकर उनमें एआई-जनरेटेड आवाज जोड़ दी है, जिससे ऐसा लगता है कि पीएम खुद इस योजना की घोषणा कर रहे हैं.

फैक्ट चेक: क्या सरकार हर परिवार को दे रही है फ्री कार ?

पीआईबी की जनता को सख्त चेतावनी

पीआईबी ने अपने आधिकारिक 'X' (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर इस फेक न्यूज का स्क्रीनशॉट साझा करते हुए लोगों को आगाह किया है. एजेंसी ने कहा, ‘कृपया सतर्क रहें. ऐसे लुभावने कंटेंट के झांसे में न आएं और न ही इन्हें आगे फॉरवर्ड करें. केंद्र सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं की सही जानकारी के लिए केवल आधिकारिक वेबसाइट http://myscheme.gov.in पर ही जाएं.’

एजेंसी ने यह भी स्पष्ट किया कि लोग किसी भी संदिग्ध जानकारी या वीडियो को फैक्ट चेक के लिए @PIBFactCheck पर भेज सकते हैं.

निजी डेटा चोरी होने का बड़ा खतरा

साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे वीडियो का मुख्य उद्देश्य लोगों को 'फिशिंग' (Phishing) जाल में फंसाना है. जब यूजर्स 'मुफ्त कार' के लालच में फर्जी वेबसाइट पर अपनी निजी जानकारी जैसे आधार नंबर, पैन कार्ड या बैंक विवरण दर्ज करते हैं, तो स्कैमर्स उस डेटा का उपयोग वित्तीय धोखाधड़ी के लिए कर सकते हैं.

कैसे पहचानें असली और नकली जानकारी?

  1. वेबसाइट का यूआरएल (URL): सरकारी योजनाओं की आधिकारिक वेबसाइटों के अंत में हमेशा .gov.in होता है.
  2. आधिकारिक घोषणा: इतनी बड़ी किसी भी योजना की जानकारी मुख्यधारा के समाचार पत्रों और न्यूज़ चैनलों पर जरूर उपलब्ध होगी.
  3. संदेह करें: यदि कोई स्कीम 'अविश्वसनीय' रूप से अच्छी लग रही है (जैसे मुफ्त कार या भारी नकद), तो वह अक्सर फर्जी होती है.

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