VIDEO: गजब का विकास है! रुद्रप्रयाग में चुनाव अधिकारी को भी नहीं मिला पक्का पुल, गिरे हुए पेड़ पर चलकर पार करनी पड़ी नदी
उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के सीमांत गांव तोषी में विकास कार्यों की बुरी हालत सामने आई है. पंचायत चुनाव की तैयारी के लिए जब सेक्टर मजिस्ट्रेट पहुंचे, तो उन्हें नदी पार करने के लिए कोई पुल नहीं मिला.
Rudraprayag News: उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के सीमांत गांव तोषी में विकास कार्यों की बुरी हालत सामने आई है. पंचायत चुनाव की तैयारी के लिए जब सेक्टर मजिस्ट्रेट पहुंचे, तो उन्हें नदी पार करने के लिए कोई पुल नहीं मिला. मजबूरी में उन्हें लॉग ब्रिज (लकड़ी का अस्थायी पुल) का इस्तेमाल करना पड़ा. यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें अधिकारी जान जोखिम में डालकर नदी पार करते दिख रहे हैं. गौरतलब है कि उत्तराखंड राज्य को बने 25 साल हो गए हैं, लेकिन दूरदराज के गांवों में बुनियादी सुविधाओं की कमी अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है.
तोषी जैसे सैकड़ों गांवों में लोग रोजाना मौत का सफर तय करने को मजबूर हैं. नदी पार करने के लिए सही पुल न होने से ग्रामीणों और अधिकारियों दोनों की मुश्किलें बढ़ गई हैं.
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चुनाव अधिकारी लकड़ी के पुल से नदी पार करने को मजबूर
उत्तराखंड में 25 सालों में विकास कार्यों की इंतहा हो गई। रुद्रप्रयाग जिले के सीमांत गांव तोषी में पंचायत चुनाव की तैयारी के लिए आज जब सेक्टर मजिस्ट्रेट पहुंचे तो नदी पार करने के लिए पुल नहीं था। फिर कैसे पार की नदी, इस वीडियो में
देखिए। विकास की गंगा बह रही है।
ऐसे सैकड़ों गांव… pic.twitter.com/IOlcQizQC3
— Ajit Singh Rathi (@AjitSinghRathi) July 13, 2025
गांवों को किया जा रहा नजरअंदाज
इस घटना ने एक बार फिर राज्य सरकार की विकास नीतियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि शहरी इलाकों में विकास कार्य चल रहे हैं, लेकिन पहाड़ी गांवों को नजरअंदाज किया जा रहा है. एशियन डेवलपमेंट बैंक की ओर से उत्तराखंड में 200 मिलियन डॉलर की मदद से डेहरादून, हल्द्वानी जैसे शहरों में जलापूर्ति और स्वच्छता सुविधाएं विकसित की जा रही हैं, लेकिन दूरदराज के गांवों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव बना हुआ है.
'चुनाव खत्म होते ही नेता गायब '
ग्रामीणों का कहना है कि वे हर साल चुनाव में वोट डालते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही नेता और वादे दोनों गायब हो जाते हैं. अधिकारी भले ही कभी-कभी पहुंच जाते हैं, लेकिन ग्रामीण तो हर दिन इन मुश्किलों से जूझते हैं. बच्चों को स्कूल जाने के लिए नदी पार करनी होती है, बीमारों को अस्पताल पहुंचाने के लिए चारपाई पर घंटों चलना पड़ता है.
मौजूदा स्थिति निराशाजनक
राज्य के ग्रामीण विकास और पलायन आयोग ने इस समस्या पर विचार किया है, लेकिन जमीन पर बदलाव नजर नहीं आ रहा. लोगों की उम्मीद है कि आने वाले चुनावों में इन मुद्दों को गंभीरता से लिया जाएगा, लेकिन अभी तक की स्थिति निराशाजनक है.
सरकार से मदद की आस
इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या विकास सिर्फ शहरों के लिए है? क्या गांवों की बुनियादी समस्याएं तब तक अनसुनी रहेंगी जब तक कोई हादसा न हो? अब देखना यह है कि क्या इस वायरल वीडियो के बाद सरकार कुछ एक्शन लेती है या यह भी बाकी मामलों की तरह केवल सुर्खियों में आकर ठंडा पड़ जाएगा.
(The above story first appeared on LatestLY on Jul 13, 2025 03:58 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

